चीन को घेरने की लिए ट्रंप ने रचा चक्रव्यूह, G-7 में होगी भारत की एंट्री

कोरोना के कारण दुनिया में बुरी तरह घिर चुका चीन कभी लद्दाख में हिमाकत कर रहा है तो कभी ताइवान पर सैन्य कार्रवाई की धमकी दे रहा है लेकिन चीन को चौतरफा घेरने के लिए अमेरिका ने चक्रव्यूह तैयार कर लिया है. चीन को घेरने के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप उसके धुर विरोधी देशों को एकजुट करने में लग गए हैं।

G-7 में शामिल होगा भारत!

इसी कड़ी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जून के आखिर में होने वाली G7 समिट को सितंबर तक के लिए टाल दिया है। ट्रंप ने इसमें शामिल देशों की लिस्ट को बढ़ाने का इरादा जताया है। जिसमें भारत भी शामिल है। ट्रंप ने कहा कि वह जी7 में भारत, रूस, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को शामिल करना चाहते हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति ने मौजूदा जी7 फॉर्मेट को पुराना और आउटडेटेड बताया है.

बुरी तरह घिरेगा चीन

ट्रंप के इस कदम को जानकार मास्टर स्ट्रोक की तरह देख रहे हैं. जानकारों का मानना है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली सात आर्थिक शक्तियों के संगठन ग्रुप ऑफ सेवन में भारत के शामिल होने से चीन का बुरी तरह घिरना तय है.  यहां ये भी जानना जरुरी है कि इस संगठन में शामिल सभी सात देश जिसमें अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, इटली, कनाडा, जर्मनी और जापान कोरोना वायरस से बुरी तरह प्रभावित हैं चीन को कई बार सार्वजनिक रूप से खरीखोटी सुना चुके हैं।

क्यों जरूरी है भारत?

हिंदुस्तान दक्षिण एशिया का शक्तिशाली देश है ट्रंप यह जानते हैं कि भारत के बिना वह चीन को मात नहीं दे सकते इसलिए पिछले कुल सालों में अमेरिका ने कई ऐसे बड़े हथियारों को भारत को दिया है जो वह जल्दी किसी दूसरे देश को नहीं देता. अमेरिकी सेना भारत के साथ हिंद महासागर में खुफिया सूचनाओं का भी आदान-प्रदान करती हैं.

इन देशों को शामिल करना चाहते हैं ट्रंप

डोनाल्ड ट्रंप जी-7 में भारत के साथ ही रूस, साउथ कोरिया और ऑस्ट्रेलिया को भी शामिल करना चाहते हैं और इसका कारण यही है कि इन सभी देशों के चीन के साथ संबंध अच्छे नहीं है। भारत के साथ इस वक्त चीन लद्दाख सीमा पर क्या कर रहा है ये किसी से छिपा नहीं है वहीं ऑस्ट्रेलिया के साथ भी चीन के संबंध ठीक नहीं है। चीन की सरकारी मीडिया ऑस्ट्रेलिया को ‘अमेरिका का कुत्ता’ कहती है. बात साउथ कोरिया की करें तो चीन उत्तर कोरिया का करीबी है इसलिए दक्षिण कोरिया का झुकाव अमेरिका की तरफ है, वहीं भारत और रूस के संबंध शीतयुद्ध के समय से ही काफी प्रगाढ़ रहे हैं.

ट्रंप बना रहे हैं अपना गुट

बदली हुई परिस्थितियों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और विदेश मंत्री माइक पोम्पियो कई बार सार्वजनिक रूप से चीन की आलोचना कर चुके हैं। इतना ही नहीं, ट्रंप तो कोरोना वायरस को वुहान वायरस और चीनी वायरस का नाम भी दे चुके हैं। ट्रंप ने चीन की विस्तारवादी नीतियों का विरोध करने का एलान कर दिया है वो हांगकांग का समर्थन करके चीन को चिढ़ा चुके हैं. कुल मिलाकर कहें तो जी-7 को नया रूप देने के पीछे अमेरिका का मकसद कोरोना वायरस और साउथ चाइना सी मुद्दे पर चीन के खिलाफ कड़े प्रतिबंधों के लिए अपने गुट को मजबूत करना ही है.

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