CORONA BREAKING: क्या अमेरिका में कोरोना से मौत के लिए ट्रंप की नीति जिम्मेदार, मोदी की नीति से जीतेगा भारत !

दुनियाभर में कोरोना वायरस से कोहराम मचा है अब तक सात लाख से ज्यादा लोग संक्रमित हो चुके हैं। वहीं सुपर पावर अमेरिका में कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या 1 लाख 41 हजार के पार है जबकि भारत में कोरोना पॉजिटिव मरीजों की संख्या 1071 है वहीं 29 लोगों की मौत हो चुकी है । ऐसे में ये चर्चा लाजमी है कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी में कोरोना वायरस से जंग के लिए किसकी नीति बेहतर है । लेकिन इस पर चर्चा से पहले दोनों देशों की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति पर ध्यान देना जरूरी है ।


भारत और यूएस की भौगोलिक स्थिति


भारत की आबादी करीब एक सौ पैंतीस करोड़ है वहीं अमेरिका की आबादी करीब 32 करोड़ 77 लाख के पास है । अमेरिका मे 50 राज्य है और दुनिया के पॉपुलेशन का 4.28 फीसदी लोग यहां रहते हैं । जबकि भारत में 28 राज्य और 9 केंद्र शासित प्रदेश है । यहां दुनिया की आबादी का कुल 17.9 फीसदी लोग रहते हैं ।

भारत और अमेरिकी की आर्थिक स्थिति


अमेरिका विकसित देश है वहीं भारत विकासशील देश है । अमेरिका का जीडीपी 19.39 लाख करोड अमेरिकी डॉलर है जबकि भारत का जीडीपी साल 2019-20 35.99 लाख करोड़ रुपए है ।
अब बात करते है कोरोना के बारे में ..जहां तक अमेरिका का सवाल है । इस साल कोरोना अमेरिका में 15 जनवरी को दस्तक दे चुका था वहीं भारत में कोरोना के मामले 30 जनवरी को सामने आया । यानी भारत में कोरोना दो हफ्ते बाद पहुंचा था लेकिन संक्रमण के मामले यूएस में काफी तेजी से बढ़ रहा है। वहीं भारत में करीब 11 सौ लोग इस वायरस से संक्रमित है ।

कोरोना पर मोदी और ट्रंप की नीति


छोटी बातों पर बड़ी पहल


कोरोना पर अगर देखा जाए तो पीएम मोदी की सुझबूझ और सही नीति अब तक कारगर दिख रही है । पीएम मोदी ने कोरोना का पहला मामला आने के साथ ही देशवासियों को आगाह किया । छोटी-बातों पर खास ध्यान दिया जाए । जैसे हाथ मिलाने के बदले नमस्कार , लोगों को भीड़ से दूर रहने और अपने कैबिनेट साथियों के विदेश दौरे पर रोक लगाना । साथ विदेश से लाए गए भारतीयों को आइसोलेशन और क्वारंटाइन करने पर जोर दिया । जबकि ट्रंप ने कोरोना को पैसों के बल पर जीतने की बात की उन्होंने 13 जनवरी 2020 को अमेरिका में राष्ट्रीय आपात काल की घोषणा कर दी और इस महामारी से लड़ने के लिए संघीय कोष में 50 अरब डालर की राशि देने का ऐलान किया ।

मोदी रणनीति बनाने में जुटे रहे


कोरोना से जंग के लिए मोदी हर रोज बैठक करते हैं और अपने स्वास्थ्य मंत्री को इस बीमारी से लड़ने के लिए तैयारी का खुली छूट दे रखी है । मोदी ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बात की और देश को मुश्किल हालात से लड़ने के लिए तैयार रहने को कहा । जबकि अमेरिका में ऐसा कुछ भी नहीं दिखा ।


लॉकडाउन से कोरोनो को हराने की कोशिश


मोदी ने सबसे पहले कोरोना वायरस से लड़ने के लिए देश वासियों को संबोधित किया और 22 मार्च को जनता कर्फ्यू लगाया । उसके बाद पीएम ने 24 मार्च आधी रात से 14 अप्रैल तक के लिए लॉकडाउन का ऐलान किया । उन्होंने लोगों से अपने घरों में रहने की अपील की । देश मे रेलवे, हवाई सफर, बसों और मेट्रो ट्रेन के आवाजाही पर भी रोक लगा दी । इसके पीछे उनका मकसद था सोशल डिस्टेंसिंग से कोरोना पर काबू पाना ।


यूएस में आपातकाल बना आफत


अमेरिका मे 2200 लोगों की मौत के बाद कोई लॉकडाउन नही है लेकिन बढ़ते मौत की वजह से डोनाल्ड ट्रंप ने अब सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा निर्देश को दो हफ्ते के लिए बढाया है । इतना ही नहीं ट्रप ने कहा कि कोरोना से अमेरिका में एक लाख तक मौत हो सकती है ।
अगर देखा जाए तो मोदी कोरोना को लेकर अपनी जनता के प्रति ज्यादा फिक्रमंद है । गरीब , मजदूरों, महिलाएं, मीडिल क्लास के लिए आर्थिक पैकेज का ऐलान कर चुके हैं । मेडिकल इक्वीपमेंट की खरीदारी की जा रही है । डॉक्टरों की हौसलाअफजाई में पीएम मोदी कोई कोरकसर नहीं छोड़ रहे हैं । वहीं अमेरिका के न्यूयॉर्क में अस्पतालों में बेड, मास्क और वेंटिलेटर की कमी पड़ गई है । ऐसे में मौत के आंकड़े भी दोनों देशों की कोरोना के खिलाफ नीति का गवाह खुद है ।

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