हाय रे सिस्टम! पिता के कंधे पर ऑक्सीजन…नवजात के साथ भटकते रहे मां-बाप, मासूम की गई जान

बिहार में सुशासन राज में श्मशान बनते नजर आ रहे हैं अस्पताल। आज बिहार की अवाम मुसीबत का डबल कहर झेल रही है। एक तरफ बिहार में कोरोना कहर बरपा रहा है और दूसरी तरफ सैलाब का भी सितम जारी है। इन सबके बीच बिहार के सरकारी अस्पतालों से जो तस्वीर सामने आ रही है वो दहलाने वाली है।

सुशासन राज में श्मशान बने अस्पताल!

मां के हाथों में मौजूद ट्रे में नवजात और कंधे पर ऑक्सीजन लिए मासूम का पिता। ये सुशासन बाबू के राज में बक्सर के सरकारी अस्पताल की तस्वीर है। यहां कागजी कार्रवाई करते-करते इतनी देर हो गई कि नवजात ने दुनिया देखने से पहले ही दुनिया को अलविदा कह दिया।

अस्पतालों के चक्कर काटते-काटते मासूम की मौत

बताया जा रहा है कि ये तस्वीर बक्सर के सदर अस्पताल की है और 23 जुलाई को ली गई है। बक्सर के सखुआना गांव निवासी सुमन कुमार की पत्नी ने बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। माता-पिता बच्ची को लेकर तुरंत सदर अस्पताल पहुंचे। लेकिन, कागजी कार्रवाई में देर हो गई और नवजात ने दम तोड़ दिया।

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बक्सर से अश्विनी चौबे सांसद है और केंद्र सरकार में स्वास्थ्य राज्य मंत्री हैं। लेकिन इससे बक्सर और बिहार की स्वास्थ्य सेवाओँ पर कोई खास असर नहीं पड़ा है। बिहार में अस्पतालों के अंदर से आ रही तस्वीरें बताती हैं कि सूबे में स्वास्थ्य व्यवस्था का क्या हाल है। मरीज दम तोड़ रहे हैं लेकिन उन्हें पूछने वाला कोई नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्था के सारे दावे खोखले हैं। इलाज के नाम पर हो रही है तो बस खानापूर्ति।

कोरोना काल में बिहार के अस्पताल बीमार!

बिहार में कोरोना संक्रमितो की संख्या चालीस हजार के करीब पहुंच चुकी है। हर दिन कोरोना संक्रमितों का आकंड़ा तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन बिहार के अस्पताल खुद बीमार है, इतने बीमार की मरीजों के इलाज से पहले इनका मर्ज़ ठीक करना ज़रूरी है।

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