श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मौत वाला सफर ! 4 दिन में तय हो रही 30 घंटे की यात्रा, अब तक 5 की मौत

तपती गर्मी में भूख और प्यास से बेहाल मुसाफिर, 30 घंटों का सफर 70 घंटों में, और ट्रेन में प्रसव के साथ ही गर्मी और भूख प्यास से होती मौतें. हाल ही में सामने आई ये सभी बातें बयां कर रही हैं कि कामगारों और मजदूरों के लिए चलाई जा रही श्रमिक स्पेशल ट्रेन में सफर कितना मुश्किलों भरा है.

मंजिल पर देर से पहुंच रहीं ट्रेनें

भारतीय रेलवे ने जो श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलायी हैं उसमें अव्वल दर्जे की लापरवाही देखने को मिल रही है कई ट्रेनें तो अपने गंतव्य स्थल ना पहुंचकर दूसरे स्टेशन बल्कि यूं कहिये कि दूसरे राज्यों में पहुंच जा रही हैं वसई गोरखपुर ट्रेन के ओडिशा पहुंचने वाली घटना इसका सबसे बड़ा उदाहरण है लेकिन बात सिर्फ इतनी ही नहीं हालत ये है कि कई ट्रेनें बहुत देर से अपनी मंजिल तक पहुंच रही है. रास्ते में भूख, प्यास और गर्मी से मजदूर परेशान है. मजदूरों के सब्र का बांध टूट रहा है और वह हंगामा करने के लिए मजबूर हो रहे हैं.

4 दिन में दिल्ली से समस्तीपुर

दिल्ली से बिहार के मोतिहारी जा रही ट्रेन चार दिन में समस्तीपुर पहुंची, जबकि यात्रा महज 30 घंटे की है.  मीडिया रिपोर्टस के मुताबिक मजदूरों का कहना है कि उन्हें मोतिहारी का टिकट दिया गया है और ट्रेन पिछले 4 दिनों से उन्हें घुमा- घुमा कर ले जा रही है.

फ्लेटफॉर्म पर बच्ची का जन्म

दिल्ली से मोतिहारी के लिए चली ट्रेन चार दिनों में समस्तीपुर पहुंची,  इस लंबे सफर के दौरान ट्रेन में ही महिला को प्रसव पीड़ा शुरू हो गई तो उसे ट्रेन से उतारा गया. आलम ये था कि महिला ने बिना किसी मेडिकल सुविधा के एक बच्ची को प्लेटफॉर्म पर ही जन्म दिया. जिसे बाद में अस्पताल पहुंचाया गया.

मुजफ्फरपुर में महिला-बच्चे ने तोड़ा दम

दूसरे प्रदेशों  से प्रवासियों की वापसी के बीच मुजफ्फरपुर जंक्शन पर सोमवार को दिल्ली से लौटे पश्चिमी चंपारण जिले के एक बच्चे और कटिहार की महिला की मौत हो गई। इस दौरान एक मां की गोद सुनी हो गई तो दूसरी घटना में दो बच्चों के सिर से ममता का आंचल छिन गया। मृतकों में पश्चिमी चंपारण जिले रहने वाले मोहम्मद पिंटू का साढ़े साल का बेटा इरशाद शामिल है वहीं अरबीना खातून नाम की एक 31 साल की महिला शामिल है जो लंबे सफर में भूख प्यास की मार नहीं झेल पाए.

सबकी एक जैसी कहानी

देश के दूसरे हिस्सों से बिहार पहुंचने वाली सभी लोगों की करीब एक जैसी कहानी है. कोई 22 तारीख से सफर में था तो कोई भूख प्यास और गर्मी की वजह से बेहाल. पुणे से समस्तीपुर पहुंचने में ट्रेन ने 4 दिन का वक्त लिया. रेलवे प्रशासन का कहना है कि ट्रैक खाली नहीं मिलने की वजह से रूट डायवर्ट किया जा रहा है. कोशिश की जा रही है कि मजदूरों को खाना- पानी दिया जा सके.

खाना-पानी लूटने पर मजबूर मजदूर

रेलवे मुसाफिरों के खाने पीने के लंबे चौड़े दावे जरुर कर रहा है लेकिन भयंकर गर्मी के बीच बेहद लंबे सफर के दौरान खाने और पीने के पानी की कमी से जूझ रहे मजदूर जगह-जगह खाने और पानी की लूट करने पर मजबूर हैं इस लूटपाट में जिसके हाथ खानी पानी लग जाता है वो खुशनसीब है जिसे खाना-पानी नहीं मिल पाता उसके लिए सफर बेहद मुश्किलों भरा साबित हो रहा है. ऐसे में अगर आप श्रमिक स्पेशल ट्रेन से यात्रा करने वाले हैं तो अपने लिए ज्यादा से ज्यादा इंतजाम करके चलें क्योंकि सफर तो समय से शुरु होगा लेकिन आप पहुंचेगें कब ये कोई निश्चित नहीं.

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