दिल्ली में तेल का उल्टा खेल, देश में पहली बार पेट्रोल से महंगा हुआ डीजल

पेट्रोल डीजल की कीमतों का लगातार बढ़ना जारी है. बुधवार को लगातार 18वें दिन देश में तेल की कीमतों में इजाफा हुआ इस दौरान दिल्ली में एक नया रिकॉर्ड बन गया और देश में पहली बार डीजल पेट्रोल से भी महंगा हो गया और इसकी कीमत 80 रुपए प्रति लीटर के पास तक पहुंच गई.

डीजल सस्ता, पेट्रोल महंगा

बुधवार को लगातार 18वें दिन डीजल की कीमत में बढ़ोतरी हुई जबकि पेट्रोल की कीमत कल के ही बराबर है लिहाजा दिल्ली में पेट्रोल की कीमत तो कल के बराबर 79.76 रुपये पर टिकी रही लेकिन डीजल की कीमत 79.40 रुपये से बढ़कर 79.88 रुपये प्रति लीटर हो गई जो कल के मुकाबले 48 पैसे महंगा है।

देश में पहली बार ऐसा हुआ

बुधवार यानी आज भी सरकारी तेल कंपनियों ने ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी की और दिल्ली क्या, पूरे देश में ऐसा पहली बार हुआ कि डीजल की कीमत पेट्रोल से ज्यादा हो गई। आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि पिछले 18 दिनों में डीजल की कीमत में 10.48 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है जबकि पेट्रोल भी 8.50 रुपये महंगा हुआ है यानी महंगाई जबरदस्त तरीके से बढ़ी है लेकिन इसका कहीं कोई जिक्र नहीं है.

दिल्ली में क्यों महंगा हुआ डीजल?

दिल्ली के अलावा बाकी राज्यों ने डीजल अब भी पेट्रोल के मुकाबले कुछ सस्ता है दिल्ली में डीजल क्यों महंगा हो गया इसकी वजह ये है कि दिल्ली में तेल पर लगने वाला टैक्स अप्रैल तक देश भर में सबसे कम हुआ करता था, जबकि मुंबई में ये सबसे अधिक था। लेकिन इस साल 4 मई को जब से दिल्ली सरकार ने डीजल पर लगने वाला वैट 16.75 फीसदी से बढ़ाकर 30 फीसदी किया है, तब से दिल्ली में डीजल की कीमतें मुंबई से भी अधिक हो गई हैं। दिल्ली में पेट्रोल पर भी वैट बढ़ाया गया है जो पहले 27 फीसदी था और अब बढ़ाकर 30 फीसदी कर दिया गया है।

क्या होगा असर ?

डीजल की कीमत बढ़ाने का चौतरफा असर होता है. इससे ट्रांसपोर्ट की लागत बढ़ जाएगी और महंगाई भी बढ़ेगी. जाहिर है जनता पर दोहरी मार पड़ेगी. एक तरफ ट्रांसपोर्ट के लिए ज्यादा किराया देना पड़ेगा और दूसरी तरफ महंगे सामान खरीदने पड़ेंगे. इतना ही नहीं ऑटो सेक्टर की बिक्री पर भी इसका असर पड़ेगा.

क्या है सरकार की नीति ?

तेल पर अब सरकार ने अपनी नीति बदल दी है. सरकारें अब इस कोशिश में हैं कि पेट्रोल और डीजल में कीमत के अंतर को कम किया जाए. इसकी वजह यह है कि दोनों पर लागत लगभग एकसमान होती है और डीजल सस्ता बेचने के लिए सरकार को सब्सिडी देनी पड़ती है. डीजल पर सब्सिडी देने के पीछे यह कल्याणकारी सोच थी क्योंकि इसका इस्तेमाल खेती, ट्रांसपोर्ट, बिजली जैसे जरूरी सेक्टर में होता है. मगर यूपीए सरकार में इस सब्सिडी का बोझ काफी ज्यादा हो गया था, जिसके बाद डीजल और पेट्रोल की कीमत में अंतर कम करने की बात की जाने लगी और इसी का नतीजा है कि आज पेट्रोल और डीजल की कीमतों में कोई फर्क नहीं है.

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