WHO की मदद में आगे आया चीन, WHO के लिए चीन और अमेरिका में कौन अहम? पढ़ें ये रिपोर्ट

कोरोना वायरस संक्रमण का कहर सबसे अधिक अमेरिका पर टूटा है । कोरोना काल में अमेरिका हमेशा WHO को आंख दिखाता रहा। उसने इस महामारी के फैलने के लिए वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन के लचर रवैये को जिम्मेदार बताया। WHO को दी जानेवाली आर्थिक मदद पर भी रोक लगा दी है। ऐसे में चीन WHO की मदद में आगे आया है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि चीन और अमेरिका के बीच अहम की लड़ाई में WHO का भला कौन कर पाएगा? क्या चीन के फंडिंग से WHO की बात बनेगी या फिर अमेरिका के आगे WHO को गिड़गिड़ाना पड़ेगा?

चीन की WHO को फंडिंग

कोरोना संक्रमण पर अमेरिका WHO  पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाता रहा है । अमेरिका ने अपनी फंडिंग तक रोक दी । वहीं चीन को मौका मिल गया । उसने वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन को हर संभव मदद का भरोसा दिलाया है । चीन ने WHO  को 3 करोड़ डॉलर दिया है । चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि हमने कोरोना महामारी से जूझ रही दुनिया को बेहतर हेल्थ कंडिशन दिलाने के लिए  WHO की कई स्तर पर मदद दी है । वहीं चीन के मदद देने के बावजूद WHO  ने एक बार फिर अमेरिका से मदद की अपील की है ।

कितनी फंडिग करता है यूएस ?

दरअसल WHO को अमेरिका सबसे ज्यादा फंडिंग करता है । अगर अमेरिका के फंड की बात करें, तो 2019 में उसने WHO में 400 मिलियन डॉलर की फंडिंग की जो कि WHO के कुल बजट का 15 फीसदी है । इस बार अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने करीब 500 मिलियम डॉलर की फंडिंग WHO को ना करने की बात कहीं । उन्होंने कहा कि इस पैसे को अपने लोगों के बेहतरी पर खर्च करेंगे । ऐसे में चीन की फंडिंग की बात करें तो अमेरिका के सामने कुछ खास नहीं है ।

WHO का फंड और कहां से आता है?

आइए जानते है कि WHO  में फंडिंग का आधार क्या है । यह फंड़ सदस्य देशों से आता है । कौन देश किनता फंड देगा । ये दो चीजों से तय होता है , पहला देश की अर्थव्यवस्था और दूसरा पॉपूलेशन ।ज्यादा बड़ी इकोनॉमी वाले देश ज्यादा फंड देते हैं । असेस्ड कंट्रीब्यूशन को वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेशन की कोर फंडिंग मानी जाती है ।इस फंड का इस्तेमाल WHO अपने  रोजमर्रा के खर्च और जरूरी प्रोग्राम चलाने के लिए करता है । तो जान लीजिए अमेरिका 15 फीसदी फंडिंग करता है । इसके बाद अमेरिका के ही बिल और मेलिंडा गेट्स 10 फीसदी और ब्रिटेन 8 फीसदी फंडिंग करता है । जबकि चीन  ने 2018-19 में महज 86 मिलियम डालर का योगदान दिया है ।

बहरहाल WHO ने मार्च 2020 में एक कैंपेन चलाया,  जिसमें वह कई देशों से इस महामारी से निपटने के लिए मदद ले रहा था। इसमें भी अमेरिका और चीन उन देशों में से एक हैं, जिन्होंने सबसे अधिक मदद की है । WHO की वेबसाइट के मुताबिक कोरोना संकट के लिए चीन ने 2.1 करोड़ अमेरिकी डॉलर दिए हैं जबकि अमेरिका की ओर से 1.469 करोड़ डॉलर की मदद दी गई है। जबकि चीन तीन करोड़ डॉलर दान देने की बात कर रहा है ।

ऐसे में चीन के दान से WHO कोरोना वायरस से लड़ने में कितना सक्षम होगा ये तो समय बतलाएगा लेकिन WHO के लिए समस्या का अंत यहीं नहीं होता है । वर्तमान में WHO के सदस्य देशों में 150 ऑफिस हैं और पूरे संगठन में करीब 7 हजार कर्मचारी काम करते हैं । WHO, संयुक्त राष्ट्र संघ का हिस्सा है और इसका मुख्य काम दुनियाभर में स्वास्थ्य समस्याओं पर नजर रखना और उन्हें सुलझाने में मदद करना है । अगर अमेरिकी फंड नहीं मिलता तो इसके वर्क फंक्शन पर बहुत ज्यादा असर पड़ेगा । लिहाजा WHO  के चीफ ने अमेरिका से मदद की अपील की है ।

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