रोबोट उड़ाएगा फाइटर जेट! रूस ने स्टिल्थ फाइटर जेट SU-57 से शुरू की ट्रेनिंग

आज सिर्फ जमीन पर ही जंग के लिए सुपरसोल्जर को तैयार नहीं किया जा रहा। आसमान के रण के लिए भी रोबोट को तैयार किया जा रहा। रूस रोबो सोल्जर की फौज तैयार करने के साथ-साथ रुपहले पर्दे की दुनिया के आयरन मैन की तरह ऐसा किलर रोबोट तैयार कर रहा है जो दुनिया के सबसे विध्वंसक स्टिल्थ फाइट प्लेन SU-57 को उड़ाएगा।

रूस का ‘ब्रह्मास्त्र’ SU-57 

रूसी राज्य मीडिया का दावा है कि पुतिन के विध्वंसक फाइटर प्लेन SU-57 को उड़ाने के लिए रोबोट को ट्रेनिंग दी जा रही है। दावा किया गया है कि SU-57 लड़ाकू विमान किसी अनजान जगह पर मानव रहित उड़ान भर रहा है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फाइटर जेट में रोबोट के साथ एक पायलट भी मौजूद रहता है जो सिर्फ फाइटर जेट के सिस्टम की निगरानी करता है। यानी सुखोई-57 का कमांड रोबोट के हाथों में देने की तैयारी शुरू हो चुकी है। अब जंग के मैदान में इंसानों के बजाए मशीन युद्ध लड़ते नजर आएंगे।

रूस का सबसे विध्वंसक फाइटर प्लेन है Su-57

Su-57 को एंटी-एयर और एयर-टू-ग्राउंड युद्ध के लिए डिज़ाइन किया गया है। रूस का फिफ्थ जेनरेशन स्टील्थ फाइटर जेट विध्वंस हथियार और सेंसर से लैस है। ये हजारों किलोमीटर दूर तक तबाही मचाने में सक्षम है। Su-57 एक सिंगल-सीट वाला फाइटर जेट है, यानी पायलट के अलावा दूसरा कोई नहीं बैठ सकता। लिहाजा मुमकिन है कि SU-57 के दो सीटों वाले संस्करण हो या फिर किसी सॉफ्टवेयर की मदद से ग्राउंड पर बैठे लोग इसे कंट्रोल कर रहे हों।

फ्यूचर वॉर के लिए तैयार हो रही दुनिया

भविष्य के युद्ध के लिए ऐसे हथियार बनाए जा रहे हैं। जिसका कमांड एंड कंट्रोल जंग के मैदान से कोसो दूर होगा। बस मशीनी योद्धा अपने दुश्मनों के खिलाफ लोहा लेते नजर आएंगे। अमेरिका के किलर ड्रोन इसी की बानगी हैं। जिसमें कोई पायलट नहीं होता। जमीन पर बैठे लोग इसे कंट्रोल करते हैं और तबाही का बटन दबाते हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या अब रूस ड्रोन से भी आगे बढ़ कर फाइटर जेट को रोबोट के हवाले कर देगा, जो जमीन पर बैठे कमांड का हुक्म मान कर दुश्मनों के इलाके में बारूद की बारिश करेंगे।

रूस का सुपरसोल्जर है सुखोई-57

रूस को रक्षा तकनीक का बादशाह माना जाता है और इन जेट्स की मदद से वो आने वाली कई सदियों तक रक्षा क्षेत्र में अपना दबदबा कायम कर रख सकता है। सुखोई-57 की बात करें तो रूस का ये भरोसेमंद स्टिल्थ फाइटर प्लेन हवा से हवा और हवा से जमीन पर हमला करने में माहिर है। मौसम कैसा भी हो इसकी राह में रोड़ा नहीं बनता। चाहे दिन हो या रात दुश्मनों पर इसका घात जबरदस्त होता है।

SU-57 की बेमिसाल ताकत

SU-57 में दुश्‍मन के एयर डिफेंस सिस्‍टम को ध्‍वस्‍त करने की ताकत है। ये ड्रोन के साथ भी काम कर सकता है। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक अगर दुश्‍मन देशों ने अपने रेडार की मदद से कम्‍यूनिकेशन को जाम कर दिया तो भी ये विमान हमला करने में सक्षम है। सुखोई 57 राडार की पकड़ में नहीं आने वाली स्टिल्थ टेक्नॉलजी से लैस है।

डेंजरस मिशन के SU-57 तैयार

Su-57 खतरनाक मिशनों को पूरा करने के लिए बनाया गया है। इसे बनाने में ऑटोमेशन और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस का इस्‍तेमाल किया गया है। यही नहीं SU-57 अपने अड्डे पर से ही दुश्‍मन के एयर स्‍पेस पर नजर रख सकता है और दुश्मन के सिस्‍टम से आसानी से निपट सकता है। अगर दुश्मन देशों ने अपनी राडार की मदद से कम्यूनिकेशन को जाम कर दिया तो भी सुखोई 57E हमला करने में सक्षम है।

स्टिल्थ फाइटर जेट का शहंशाह SU-57

सुखोई-57 2440 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से उड़ान भर सकता है। बताया जाता है कि सुखोई 57 20 किलोमीटर की ऊंचाई हासिल कर सकता है। सुखोई 57 की रेंज 5500 किलोमीटर है। ये अपने साथ 300 KG तक हथियार ले जाने की ताकत रखता है।

हिंदुस्तान की निगेबानी करेगा पुतिन का ‘महाबली’

रूस इस घातक फाइटर प्लेन को भारत को देना चाहता है। साल 2019 में रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपने पांचवीं पीढ़ी के सबसे घातच सुखोई लड़ाकू विमान Su-57E को राजधानी मास्को के नजदीक एयर शो में दुनिया के सामने पेश किया।अगर ये घातक फाइटर प्लेन हिंद की तरकश में शामिल हो गया तो पाकिस्तान की बोलती भी बंद हो जाएगी। खबरें ऐसी भी हैं कि भविष्य में रूस भारत को सुखोई का ये अपग्रेडिड वर्जन बेच सकता है।

जिसका AI जितना ताकतवर, दुनिया उसके कदमों पर

आज दुनिया के कई देश आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से लैस हथियारों का जखीरा जुटा रहे हैं।रूस पहले से ड्राइवरलेस टैंक तैयार कर रहा है। हाल ही में जारी हुए एक वीडियो में जिसमें रशिया आर्मी को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बेस्ड ड्रायवरलेस टैंक और रिमोट कंट्रोल्ड ड्रोन की टेस्टिंग करते हुए देखा गया है। वहीं हिंदुस्तान भी अपनी सेना को ज्यादा घातक बनाने की तैयारी में जुटा है। आने वाले समय में जंग के मैदान में सैनिकों की जगह रोबोट लड़ते दिखाई देंगे। जिस देश का आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जितना ताकतवर होगा। युद्ध के मैदान में जीत उसी की होगी।

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