घायल सैनिक के पिता ने ली राहुल गांधी की क्लास!, गृहमंत्री अमित शाह ने दी ओछी राजनीति छोड़ने की नसीहत

सरहद पर जितना टेंशन भारत और चीन के बीच है उससे भी ज्यादा भारतीय राजनीति का पारा चढ़ा हुआ है। शहीद को लेकर देश में सियासी वार पलटवार हो रहे हैं। कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी सवाल उठा रहे हैं वहीं सत्ता पक्ष उन्हें कठघरे में खड़ा कर रहा है।

घायल सैनिक के पिता की राहुल गांधी को नसीहत

सबसे पहले LAC पर खूनी झड़प में घायल हुए एक पिता का दर्द सुनिए फिर आपको आगे की पूरी सियासी लड़ाई की कहानी बताएंगे।

एक पिता की टीस का वीडियो वायरल

न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक वीडियो ट्वीट किया जिसमें LAC पर घायल एक सैनिक के पिता ने कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी को नसीहत देते हुए कहा कि भारतीय सेना एक मजबूत सेना है और चीन को हरा सकती है। राहुल गांधी इसमें राजनीति न करें। मेरे बेटे ने सेना में लड़ाई लड़ी और सेना में लड़ता रहेगा।

शहादर पर सियासत ना करने की अपील

वीडियो के जरिए सरहद की हिफाजत करने वाले एक जाबाज के पिता को अपने देश की सेना पर पूरा भरोसा है। उन्हें अपने बेटे पर गर्व है। साथ ही एक टीस भी है कि आखिर क्यों राहुल गांधी सेना पर सियासत कर रहे हैं।

अमित शाह का राहुल गांधी पर करारा वार

एक पिता के टीस का ये वीडियो जब वायरल हुआ तो सत्ता पक्ष को बैठे बिठाए विरोधी पर हमला करने का नया हथियार मिल गया। गृहमंत्री अमित शाह ने अपने ट्वीटर अकाउंट से ये वीडियो शेयर किया और लिखा। जब पूरा देश एक है तो ऐसे में राहुल गांधी को भी छोटी राजनीति से ऊपर उठकर देश के हित में खड़ा होना चाहिए।

राहुल गांधी का पीएम मोदी को चैलेंज

दरअसल LAC पर गलवान में 20 भारतीय जवानों की शहादत के बाद से ही मोदी सरकार पर सवालों की बौछार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने लद्दाख में चीन के साथ गतिरोध पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को लेकर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री ने भारतीय इलाके चीन को सौंप दिए हैं।

ट्वीटर पर तल्ख हैं राहुल के तेवर

राहुल गांधी ने ट्वीट करते हुए लिखा कि प्रधानमंत्री ने चीनी आक्रामकता के आगे भारतीय इलाके को चीन को सौंप दिया है। अगर ये भूमि चीन की थी तो हमारे सैनिक क्यों शहीद हुए? वे कहां शहीद हुए?

आपको बता दें कि लद्दाख में 20 जवानों के शहीद होने के बाद से ही कांग्रेस नेता राहुल गांधी लगातार सवाल उठा रहे हैं. इससे पहले उन्होंने सवाल उठाया था कि सेना के जवानों को निहत्थे भेजने का फैसला किसका था. इस पर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भी उन्हें करारा जवाब दिया था।

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