कोरोना की काली छाया ने बदला इतिहास, केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट भी अब देरी से खुलेंगे

क्या आपने सुना है कि बाबा केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट के खुलने की तारीख कभी बदली है ?  नहीं ना, लेकिन ‘कोरोना काल’ ने इतिहास को बदलकर रख दिया है । इस वायरस ने मानव और उसकी आस्था और परंपरा पर आघात किया है । इसी वजह से केदारनाथ और बद्रीनाथ के कपाट के खुलने की तारीख बदलनी पड़ी है । जो कभी नहीं हुआ वो साल 2020 में कोरोना की वजह से हो रहा है । तो इसे कह सकते हैं ना की घोर कलियुग है !

कोरोना ने नहीं खुलने दिया कपाट

बाबा केदारनाथ और भगवान बद्रीनाथ के कपाट उनके रावलों की मौजूदगी में सदियों से खुलता रहा हैं । लेकिन इस बार केदारनाथ के रावल कोरोना की वजह से महाराष्ट्र में फंस गए थे क्योंकि उन्हीं के पास बाबा का मुकुट रहता है जबकि बद्रीनाथ के रावल केरल में फंसे थे । केदारनाथ के रावल भीमाशंकर लिंग रविवार सुबह ऊखीमठ पहुंच गए । बद्रीनाथ के रावल भी सोमवार को उत्तराखंड पहुंचने वाले हैं । कोरोना वायरस की वजह से इन दोनों रावलों को 14 दिन के क्वारंटाइन में रहना होगा । इस दौरान वो किसी से नहीं मिल सकते हैं । इसी वजह से कपाट खोलने के समय में बदलाव करना पड़ा है ।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिग पर नहीं बनी बात

केदारनाथ और बद्रीनाथ धाम मंदिर कमेटी के मेंबर और धर्माधिकारियों की कपाट खोलने के मसले पर अहम बैठक हुई । जिसमें कपाट खोलने की विधि पर चर्चा हुई । इसमे वीडियो कॉन्फ्रेंसिग और किसी दूसरे रावल या पुजारी से कपाट खुलवाने की बात सामने आई । जिसे कमेटी और धर्माधिकारियों ने अस्वीकार कर दिया । टिहरी महाराज चाहते हैं की चारों मंदिर के कपाट एक साथ ही खुलें ।

कब खुलेंगे कपाट?

मीटिंग के बाद तय हुआ कि केदारनाथ के कपाट 14 मई और बद्रीनाथ के 15 मई को खुलेंगे । जिसकी घोषणा उत्तराखंड  के संस्कृति मंत्री सतपाल महाराज ने किया । इससे पहले केदारनाथ के कपाट 29 अप्रैल को सुबह 6 बजकर 10 मिनट पर खुलने थे  और बद्रीनाथ के कपाट 30 अप्रैल को सुबह साढ़े चार बजे खुलने थे ।

कैसे तय होता है कपाट खुलने का समय?

दरअसल हर साल बसंत पंचमी पर बद्रीनाथ के कपाट खोले जाने का मुहूर्त निकाला जाता है । जो टिहरी महाराज के नरेंद्र नगर स्थित दरबार में तय होती है । टिहरी महाराज की जन्म कुंडली देखकर राज्य ज्योतिष और मंदिर के अधिकारी यह दिन तय करते हैं । वर्तमान में टिहरी के राजा मनुजेंद्र शाह हैं । वहीं उत्तरकाशी जिले में स्थित गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट जहां हर साल अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर खोले जाते हैं । वहीं बाबा केदारनाथ मंदिर खुलने की तिथि शिवरात्रि को ऊखीमठ में निश्चित की जाती है। जिसे वहां के पुजारी धर्माधिकारी और रावल तय करते हैं ।

7 साल पहले पूजा में पड़ी थी खलल

इससे पहले जून 2013 में आई आपदा के वक्त कपाट तो खुल चुके थे लेकिन बद्रीनाथ की पूजा निरंतर जारी थी। जबकि केदारनाथ इलाके में भयानक नुकसान के चलते पूजा बाधित हुई थी और पुजारी मूर्ति को लेकर ऊखीमठ आ गए थे। सितंबर में सफाई के बाद दोबारा वहां पूजा हुई थी और कपाट परंपरा मुतबिक बंद किए गए थे।

हम आपको बता दें कि गढ़वाल हिमालय के चार धाम के नाम से मशहूर  बद्नारीथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के कपाट सर्दियों के मौसम में भारी बर्फवारी और ठंड की वजह से हर साल अक्टूबर-नवंबर में बंद कर दिए जाते हैं जो अगले साल दोबारा अप्रैल-मई में श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए जाते हैं । लेकिन कोरोना के कहर ने हर चीज को बदल कर रख दिया है जिससे इस बार चारों धाम के कपाट देरी से खुल रहे हैं ।

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