रंजन गोगोई ने ली राज्यसभा की सदस्यता, शपथ के दौरान कांग्रेस का वॉक आउट

भारत के पूर्व चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया रंजन गोगोई ने राज्यसभा के सदस्य के रूप में शपथ ली। राज्यसभा के सभापति एम वेकैंया नायडू ने रंजन गोगोई को शपथ दिलाई। गुरुवार को इस दौरान विपक्ष ने जमकर हंगामा किया।

कांग्रेस सांसदों ने शेम-शेम के नारे लगाए। कांग्रेस समेत दूसरी विपक्षी पार्टियों ने गोगोई की नियुक्ति को न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर हमला बताकर इसकी आलोचना की ।

16-03-2020 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने रंजन गोगोई को राज्यसभा के लिए नामित किया था। 4 महीने पहले रंजन गोगोई भारत के 46वें चीफ जस्टिस के पद से रिटायर्ड हुए थे। रिटायर्ड होने से ठीक पहले गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच जजों की पीठ ने रामजन्म भूमि विवाद पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया था।

उच्च सदन की कार्यवाही शुरू होने पर रंजन गोगोई जैसे ही शपथ लेने निर्धारित स्थान पर पहुंचे, वैसे ही विपक्षी सदस्यों ने शोर शराबा शुरू कर दिया। सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि ऐसा व्यवहार सदस्यों की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसके बाद गोगोई ने सदन के सदस्य के रूप में शपथ ली।

गोगोई ने खुद का किया बचाव

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस पद से रिटायर हुए जस्टिस गोगोई ने अपनी नियुक्ति का बचाव करते हुए कहा था कि संसद में उनकी मौजूदगी विधायिका के सामने न्यायापालिका के रुख को रखने का एक अवसर होगा। उन्होंने कहा था कि न्यायपालिका और विधायिका को राष्ट्र निर्माण के लिए मिलकर काम करने की जरूरत है। गोगोई ने कहा था कि राज्यसभा में अपनी मौजूदगी से न्यायपालिका के मुद्दों को प्रभावी तरीके से उठा पाएंगे।

सहयोगी ने उठाया सवाल

पूर्व न्यायाधीश कुरियन जोसेफ ने कहा कि पूर्व चीफ जस्टिस के राज्यसभा के सदस्य के तौर पर मनोनयन ने निश्चित रूप से न्यायपालिका की स्वतंत्रता पर आम आदमी के भरोसे को झकझोर दिया है। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका भारत के संविधान के मूल आधार में से एक है। जोसफ ने कहा, ”मैं हैरान हूं कि न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए कभी ऐसा दृढ़ साहस दिखाने वाले न्यायमूर्ति रंजन गोगोई ने कैसे न्यायपालिका की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के पवित्र सिद्धांत से समझौता किया है।” बता दें की जस्टिस जोसेफ उनके पूर्व सहयोगी थे।

राज्यसभा पहुंचते रहे हैं पूर्व चीफ जस्टिस

बता दें कि ये पहला मौका नहीं है जब पूर्व चीफ जस्टिस राज्यसभा के सदस्य मनोनीत हुए। देश में पहले भी चीफ जस्टिस के पद से रिटायर जजों को राज्यसभा भेजा जाता रहा है। इससे पहले मुहम्मद हिदायतुल्लाह और रंगनाथ मिश्रा भी चीफ जस्टिस के पद से रिटायर होने के बाद राज्यसभा के लिए मनोनीत हो चुके हैं।

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