गोवा के सभी कोरोना मरीज कैसे हुए ठीक?, ‘मौत के वायरस’ ने क्यों किया सरेंडर, जानें जीत का मंत्र

गोवा हिंदुस्तान का पहला ऐसा राज्‍य बन गया है जहां अब कोरोना संक्रमण का एक भी केस नहीं है। गोवा देश का पहला जीरो कोरोना वाला राज्‍य बन कर पूरी दुनिया में एक मिसाल कायम की है।

गोवा में ‘मौत के वायरस’ का सरेंडर

कोरोना वायरस से गोवा पूरी तरह आजाद हो चुका है। राज्य में COVID-19 से संक्रमित सातों मरीज पूरी तरह ठीक होकर अस्पताल से डिस्चार्ज हो चुके हैं। गोवा की ये उपलब्धि आज दुनिया में मिसाल बन कर उभरी है। ऐसा इसलिए क्योंकि गोवा विदेशी पर्यटकों का पसंदीदा जगह रहा है। यहां सालों पर विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा लगा रहता है।

दुनिया के लिए मिसाल बना गोवा

कोरोना को हराकर गोवा आज ना सिर्फ हिंदुस्तान के दूसरे राज्यों के लिए बल्कि दुनिया के लिए मिसाल बन गया है। हर ओर यही चर्चा हो रही है कि आखिर गोवा ने कोरोना के खिलाफ इस मुश्किल भरे जंग में कैसे जीत दर्ज की ?

शून्य की खुशी से झूम रहा गोवा

गोवा के स्वास्थ्य मंत्री विश्वजीत राणे गोवा ने कहा कि शून्य का वास्तव में बहुत मूल्य है।विश्वजीत राणे ने बताया, ‘जब देश के अलग-अलग राज्यों में कोरोना के एक-दो मामले आना शुरू हुआ था तभी गोवा अलर्ट मोड में आ गया था। कर्नाटक, महाराष्ट्र और केरल में कोरोना के केस मिलते ही गोवा राज्य की सीमा को सील कर दिया था। इसके अलावा राज्य में आम लोगों और डॉक्टरों के बीच संपर्क को कम करने का सिलसिला शुरू किया गया। क्योंकि गोवा सबसे पहले अपने फ्रंटलाइन वॉरियर्स यानी डॉक्टर्स को पूरी तरह सुरक्षित करना चाहता था। इसके राज्य की ओपीडी को बंद कर दिया गया और सिर्फ इमरजेंसी सेवा जारी रखा गया

तकनीक के दम पर कोरोना को दी मात

कोरोना को हराने में गोवा ने टेक्नॉलजी की भरपूर मदद ली। गोवा देश का पहला राज्य था जिसने व्हाट्स ऐप पर चैटबॉट की शुरुआत की । जहां 7 से 8 सवालों के जवाब देकर कोई भी कोरोना वायरस को लेकर अपनी शंका को दूर कर सकता था। ठीक उसी तरह जैसे केंद्र सरकार की ओर से जारी आरोग्‍य सेतू ऐप के जरिये कोई भी ये जान सकता है कि वो कोरोना वायरस से संक्रमित है या नहीं। इसके अलावा कॉलडॉक सेवा शुरू की गई जहां कोई समस्या महसूस होने पर कॉल के जरिए मेडिकल एडवाइज की सुविधा दी गई।

सबसे पहले अगल COVID- 19 अस्पताल का प्रस्ताव

गोवा पहला ऐसा राज्‍य है जहां सबसे पहले अलग कोविड-19 अस्‍पताल का प्रस्‍ताव रखा गया। साथ ही घरों से बाहर निकलने वालों के लिए मास्‍क का इस्तेमाल अनिवार्य किया गया। इसके अलावा गोवा में कोरोना टेस्ट में कोई कोताही नहीं बरती गई। वहां तेजी के साथ टेस्ट किये गए।

विदेशी पर्यटकों से थी चुनौती

देसी और विदेशी पर्यटकों के लिए गोवा एक पसंदीदा टूरिस्ट प्लेस रहा है। ऐसे में कोरोना को हराना एक बड़ी चुनौती थी। भारत में जब कोरोना की शुरुआत हुई तो अलग-अलग देशों की सरकारों ने अपने नागरिकों को बुलाने के लिए चार्टर फ्लाइट भेजीं। तब गोवा में ज्यादातर लोगों की रैंडम टेस्टिंग की गई जिनमें किसी में भी कोरोना के कोई लक्षण नहीं मिले। गोवा में ज्यादातर वो लोग थे जो पिछले 1-2 महीने से रह रहे थे। इसके अलावा जो थोड़े-बहुत विदेशी टूरिस्ट बचे भी, वो जहां थे उन्हें वहीं क्वारंटीन कर दिया गया। फिलहाल गोवा में विदेशी टूरिस्ट की तादाद लगभग न के बराबर है।

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