ड्रैगन की शैतानी और कोरोना से नरसंहार की नई कहानी, पढ़िए तबाही की पूरी रिपोर्ट

कोरोना के आतंक से दुनियाभर में हाहाकार मचा है । 115 से ज्यादा दिन गुजर गए कोरोना से मौत का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है । चीन से फैला संक्रमण काल बनकर दुनिया पर टूट पड़ा है । हर तरफ मौत का तांडव चल रहा है । जिस चीन से यह बीमारी फैली थी वहां दोबारा इसके संक्रमण फैलने की खबरें आ रही है । लेकिन इन सब के बीच दुनिया चीन को संदेह भरी निगाह से देख रहा है ।

आखिर देखे क्यों नहीं क्योंकि चीन हमेशा कोरोना के संबंध में हकीकत को छुपाता रहा है । शुक्रवार को चीन ने कोरोना से मौत के आंकड़े को रिवाइज करके लोगों की आशंका को और बढ़ा दिया । हर किसी को यहीं लगता है कि चीन कुछ छुपा रहा है । ऐसे में एक न्यूज चैनल की रिपोर्ट से दुनिया में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर चीन ने लैब से कैसे कोरोना वायरस को फैलाया ?

 क्या है चैनल की रिपोर्ट ?

फॉक्स न्यूज ने बड़ा खुलासा किया है कोरोना वायरस चमगादड़ के बीच स्वाभाविक रुप से उत्पन्न होने वाला कोई बायोवेपॉन नहीं है बल्कि इसे वुहान के लैब में तैयार किया जा रहा था । चैनल ने दावा किया है कोरोना वायरस का ट्रांसमिशन चमगादड़ से ह्यूमन रेस में नहीं हुआ जबकि लैब से इसका इंफेक्शन पहले वुहान और फिर दुनिया में फैला ।

 कोरोना से कौन सबसे पहले संक्रमित?

 फॉक्स न्यूज का दावा है कि सबसे पहले वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में काम करने वाली एक इंटर्न महिला गलती से संक्रमित हो गई । दरअसल चीन कोरोना वायरस के बारे में मनगढंत कहानी कहता रहा । उसने कहा कि वुहान वेट बाजार से कोराना वायरस फैला जबकि वुहान के लोगों का कहना है कि वहां चमगादड़ कभी नहीं बेचे गए । लिहाजा चीन के लैब के बदले वेट बाजार को वायरस फैलाने के लिए हॉट स्पॉट रिपोर्ट में बताया जा रहा है  । 

 वायरस पैदा करने के पीछे क्या थी मंशा?

 कोरोना के इंफेक्शन के लिए चीन भले अपने को जिम्मेदार ना माने लेकिन चैनल का दावा है कि चीन वायरस के टेस्ट में पहले से प्रयासरत था क्योंकि उसकी मंशा थी कि अमेरिका और पूरी दुनिया को ये बताए कि वायरस के बारे में स्टडी में वो कितना सक्षम है और वायरस के पहचान में चीन अमेरिका के बराबरी में खड़ा है ।

डोनाल्ड ट्रंप कराएंगे जांच

यूएस प्रेसिडेंट डोनाल्ड ट्रंप शुरू से ही कोरोना संक्रमण के मामले में चीन पर संदेह जताते रहे हैं । इस बीच व्हाइट हाउस की ब्रिफिंग के वक्त फॉक्स न्यूज के रिपोर्टर जॉन रॉबर्ट्स ने दावा किया कि

सूत्र हमें बता रहे हैं कि अमेरिका यह बात मानने को तैयार है कि भले ही कोरोना वायरस प्राकृतिक है, मगर यह वुहान का वायरोलॉजी लैब से निकला है । वहां सुरक्षा नियमों की अनदेखी करने की वजह  से एक इंटर्न संक्रमित हो गई थी । उसके बाद उसके संपर्क में आकर उसका बॉयफ्रेंड भी इंनफेक्ट हुआ और बाद में यह वायरस वुहान के वेट मार्केट पहुंचा । इस पर ट्रंप ने ना तो इस रिपोर्ट की पुष्टि की और न ही उसका खंडन किया । उन्होंने कहा,‘ हम ऐसी कई कहानियां सुन रहे हैं । हम इस पर देखेंगे । यह जो खतरनाक घटना हुई है हम उसकी विस्तृत जांच कर रहे हैं’।

चीन ने चैनल के दावे को नकारा

चीन अपने पुराने राग को अलाप रहा है उसने साफ कहा कि वुहान के लैब से वायरस नहीं फैला है । चीन ने  वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गेनाइजेश के स्टेटमेंट का हवाला देते हुए कहा कि लैब से कोरोना वायरस के फैलने का कोई सबूत नहीं है । इसकी पुष्टि WHO पहले ही कर चुका है । चीन ने इसे प्रॉपगेडा पॉलिटिक्स बताते हुए अमेरिका और इटली को आड़े हाथों लिया।

हम आपको बता दें कि चीन ने कोरोना वायरस पर जब काम करना शुरू किया तो अमेरिका ने प्रोग्राम ‘PREVENT’ के तहत चीन को मदद की थी । इसके साथ फ्रांस ने वुहान लैब को बनाने में चीन की मदद की । लेकिन सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि जब जनवरी 2018 में ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ ने वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी लैब के सेफ्टी मेजर्स को नाकाफी बताया । उसके बावजूद 23 महीने तक अमेरिका और फ्रांस क्यों हाथ पर हाथ धरे सब कुछ देखते रहे । जिसके परिणाम स्वरुप आज चीन की शैतानी साजिश सफल हो गई और दुनियाभर में कोरोना से तबाही मची है ।

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