दक्षिण कोरिया में ऐतिहासिक चुनाव, मून की दोहरी कामयाबी का क्या है राज ? जानने के लिए पढ़िए खास रिपोर्ट

दुनियाभर में कोरोना से मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है । हर तरफ लॉकडाउन हैं । दुनिया में मायूसी का माहौल है । लोग घरों में कैद है । सड़कें सूनी हैं चहल-पहल देखने को आंखें तरस गई है । ऐसे में दुनिया का इकलौता देश साउथ कोरिया ने हिम्मत का परिचय दिया । वहां संसदीय चुनाव हुआ । लोग घरों से बाहर निकले और वोट डाला । इसका नतीजा सामने आया और राष्ट्रपति मून जे इन ने जीत हासिल कर ली । कोरोना के संक्रमण काल में अगर कामयाबी मिले तो वो पल कितना सुखद होगा, इसका एहसास मून जे इन से बेहतर कौन जान पाएगा ।

संसदीय चुनाव में मून की डेमोक्रेटिक पार्टी को 163 सीटें मिलीं । उनके एलायंस पार्टनर प्लेटफार्म पार्टी को 17 सीटें हासिल हुई । सत्ताधारी डेमोक्रेटिक गठबंधन को 300 सीट में से 180 सीटें हासिल हुई हैं। जबकि मुख्य विपक्षी यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी के गठबंधन को 103 सीटें मिली हैं। 

लिटमस टेस्ट में पास मून

मून जे इन, साउथ कोरिया में लगातार दूसरी बार राष्ट्रपति बने हैं । मून ने पहली बार 10 मई, 2017 को साउथ कोरिया के 12 वें राष्ट्रपति के रूप में शपथ ली  । दरअसल, इस पद पर उन्होंने पार्क ग्युन हे का स्थान लिया था, जिन्हें भ्रष्टाचार के आरोप में महाभियोग लगाकर पद से हटाया गया था । इसके बाद मून ने सत्ता संभाला और साउथ कोरिया में हथियार नियंत्रण को लागू करने, उत्तर कोरिया, अमेरिका के बीच परमाणु कार्यक्रम की होड़ को खत्म करने और  शांति समझौता को बढ़ावा देने पर बहुत ही सही तरीके से काम किया ।  जो  साउथ कोरिया लोगों को बहुत ज्यादा प्रभावित किया । इस बीच उन्होंने कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए बेहतरीन काम किया । जिससे लोगों का भरोसा दोबारा जीतने में कामयाब हुए ।

28 साल में सबसे ज्यादा वोटिंग

साउथ कोरिया मे इस बार रिकॉर्ड मतदान हुआ । करीब 62.6 फीसदी वोट पड़े, जो 28 साल में सबसे ज्यादा है । एक करोड़ 18 लाख लोगों ने मतदान के शुरुआती चरण में या ईमेल के जरिये मतदान किया था । 1992 के चुनाव के बाद हुए मतदान का यह सर्वाधिक आंकड़ा है। पूरे साउथ कोरिया में करीब 14 हजार वोटिंग सेंटर बनाया गया था जहां वोटर्स की लंबी कतार देखी गई  । कोरोना संक्रमण की वजह से लोगों  को 3-3 फीट की दूरी पर खड़ा किया गया था । इसके लिए बजाप्ता मार्किंग की गई थी । सैनेंटाइजर, मास्क और ग्लब्स भी वोटर्स को मुहैया कराया गया ।

कोरोना पर बेहतर नीति से कामयाबी

COVID-19 पर मून सरकार ने पूरे देश में बेहतर पॉलिसी के तहत ज्यादा से ज्यादा लोगों की टेस्टिंग और ट्रेसिंग का काम किया । इससे मून जे इन की लोकप्रियता को करीब 50 फीसदी तक बढ़ गई । इसके साथ ही चुनाव प्रक्रिया को सफल बनाने के लिए साउथ कोरिया ने सरकारी कर्मचारियों के अलावा युवकों की भी सेवाएं ली गई । उनको चुनाव ड्यूटी करने के एवज़ में अनिवार्य सैनिक सेवा करने से छूट दी गई । इन युवकों ने साउथ कोरिया के 14000 मतदान केंद्रों को सैनेटाइज किया और लोगों को कोरोना के संक्रमण के प्रति अगाह करते हुए वोटिंग के लिए उत्साहित किया। इतना ही नहीं वोट डालने पहुंचें लोगों की थर्मल टेस्टिंग की गई । बॉडी टेम्प्रेचर 99.5° डिग्री से अधिक निकलता था तो दूसरे स्थान पर वोट डालने के लिए ले जाया गया । उसका कोरोना का टेस्ट करवाया करके वोटिंग सेंटर को डिसइंफेक्ट यानी वायरस मुक्त किया गया । दक्षिण कोरिया में अब तक 10 हजार से ज्यादा संक्रमित हैं और 229 लोगों की मौत हो चुकी है।

नॉर्थ कोरिया के पूर्व डिप्लोमेट भी चुनाव में जीते

लंदन में 2016 में नॉर्थ कोरिया के सीनियर डिप्लोमेट रहे थाई योंग-हो ने गंगनम सीट से चुनाव में जीत हासिल की है । उन्हें करीब 58 फीसदी वोट मिला । वो ‘यूनाइटेड फ्यूचर पार्टी’ से उम्मीदवार थे । थाई योंग-हो को चुनाव लड़ने पर उत्तर कोरिया से जान का खतरा था। इसलिए उन्होंने अपना नाम बदलकर चुनाव लड़ा ।

बहरहाल, कोरोना काल में साउथ कोरिया में संसदीय चुनाव हर तरीके से हिम्मत , संयम और संकल्प का बेहतरीन नमूना रहा । क्योंकि साउथ कोरिया में चुनाव भी भारत के तर्ज पर होता है । लोग बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं लेकिन इस 15 अप्रैल 2020 के चुनाव में ऐसा कुछ नहीं दिखा वोटर्स और अलग-अलग पार्टी के कार्यकर्ता काफी संयमित तरीके से चुनाव प्रचार करते दिखे । वहीं प्रत्याशी चुनाव के दौरान मास्क लगाकर निकले । इस सब चीजों ने चुनाव को ऐतिहासिक बना दिया ।

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