भीमा कोरेगांव हिंसा: गौतम नवलखा और तेलतुंबडे को सुप्रीम कोर्ट से नहीं मिली राहत

महाराष्ट्र की चर्चित भीमा कोरेगांव हिंसा मामले में सुप्रीम कोर्ट से गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को राहत नहीं मिली। सुप्रीम कोर्ट ने नवलखा और तेलतुंबडे की अग्रीम जनानत की अर्जी को खारिज कर दिया है। दोनों ही आरोपियों को तीन सप्ताह में सरेंडर करने का आदेश दिए गए है। साथ ही दोनों को जल्द से जल्द अपना पासपोर्ट भी सरेंडर करने को कहा है ।

क्या है पूरा मामला

1 जनवरी 2018 को भीमा कोरेगांव की लड़ाई की 200वीं वर्षगांठ के दौरान हिंसा फैल गई। इस हिंसा में एक शख्स की मौत हो गई जबकि कई लोग जख्मी हो गए थे। पुणे पुलिस का मानना था कि यलगार परिषद में दिए गए भड़काऊ भाषणों के कारण ही भीमा-कोरेगांव में हिंसा भड़की थी। यलगार परिषद की जांच में अब तक एक दर्जन से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है।

पुणे पुलिस ने एल्गार परिषद सम्मेलन में भड़काऊ भाषण, उकसावे वाला बयान और जातीय हिंसा भड़काने के आरोप में गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे को आरोपी बनाया है।

वहीं करीब एक महीने पहले गौतम नवलखा और आनंद तेलतुंबडे ने बॉम्बे हाईकोर्ट में भी अग्रिम जमानत के लिए अर्जी दी थी जिसे हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया। नवलखा और तेलतुंबड़े को इससे पहले पुणे की एक सत्र अदालत से भी भा राहत नहीं मिली थी। इसी साल जनवरी में केंद्र सरकार ने मामले की जांच NIA को सौंप दी।

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