विवाह से वैश्विक मंदी तक कोरोना का रोना, पढ़िए क्या है डायरेक्ट इफेक्ट

कोरोना से दुनियाभर में हाहाकार मचा है । कहीं से कोई शुभ संकेत नहीं मिल रहा है । भारत में भी लॉकडाउन 2.0 शुरू हो चुका है । पाबंदियों पर एडवाइजरी जारी हो चुका है । जान है तो जहान है । इसके लिए लॉकडाउन का कुल समय 40 दिनों का है । वैसे देखा जाए तो ये लॉकडाउन है लेकिन अंग्रेजी में इसे quarantine कहना ज्यादा उचित होगा । क्वारंटाइन 40 दिन की अवधि है जिसमें किसी इंफेक्शन से बचने के लिए लोगों को अलग-थलग कर दिया जाता है । वैसे में जब कोरोना की दवा नहीं है तो ये जरूरी भी है ।

कोरोना से लोगों में दहशत का आलम ये है । जरा उलटा सोचें एक तरफ खाई है तो दूसरी तरफ कुआं । लाखों लोगों की जान जा चुकी है और अब मंदी का दौर शुरू हो चुका है । देश-दुनिया में तमाम उद्योग-धंधे बंद है क्योंकि संक्रमण का खतरा बढ़ता जा रहा है । हर रोज संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है । लोग घरों में हैं । देश में लोगों को उम्मीद थी कि मध्य अप्रैल से लॉकडाउन में सरकार से कुछ ढील देगी । इस वजह से लोगों ने अपने जो सपने पहले बुन थे वो धरे के धरे रह गए है । किसी की शादी होनी थी, कोई अपना नया व्यवसाय शुरू करनेवाला था लेकिन सब कुछ चौपट हो गया है । इसका सीधा असर बाजार और आमलोगों के जीवन पर पड़ रहा है । आइए समझाते हैं कैसे कोरोना ने लोगों को तड़पाया और तरसाया …

शादी पर कोरोना की काली छाया

देश में शादी का मुहूर्त आज से शुरू हुआ है । कोरोना की वजह से देश में कई शादियां जो अप्रैल और मई के पहले हफ्ते में होनी थी टल गई हैं । बिहार और पूर्वी यूपी में कई लोगों ने शादी के लिए पहले से एडवांस कर दिया था । लेकिन लॉकडाउन की वजह से बुकिंग कैंसिल करनी पड़ी है । अकेले बिहार में 03 मई तक लॉकडाउन को देखते हुए 54,000 शादियां टल चुकी हैं । इसमें मैरेज हॉल, होटल और मंदिर की 9000 बुकिंग भी शामिल हैं। वैवाहिक खरीदारी या तैयारी नहीं कर पाए परिवारों ने मई के पहले हफ्ते तक की शादी टाल दी है । इसका असर कैटरिंग, सजावट, ज्वैलरी की शॉपिंग पर दिखने को मिल रहा है । इससे कमोबेश 2000 हजार करोड़ का नुकासन बताया जा रहा है ।

कोरोना से लड़खड़ाती अर्थव्यवस्था

कोरोना का विकासशील एशियन इकोनॉमी पर व्यापक पड़ा है । एक अनुमान के मुताबिक कोरोना से दुनिया की अर्थव्यवस्था को 77 बिलियन डॉलर से 347 बिलियन तक यानि ग्लोबल जीडीपी का 0.1 से 0.5 फीसदी तक का नुकसान हो सकता है । नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री जोसेफ इस्टलिट्ज का दावा है कि कोरोना वायरस के चलते ग्लोबल इकोनॉमी बुरी तरह प्रभावित होगी और हालात 2008 की आर्थिक मंदी से भी ज्यादा खराब हो सकते हैं । भारत में भी शेयर मार्केट में लगातार उठापटक जारी है । कोरोबारियों को करोड़ों का नुकसान हो चुका है । सरकार के लगातार आश्वासन के बावजूद मार्केट में कोई खास असर देखने को नहीं मिल रहा है ।

कोविड-19 से आयात-निर्यात पर असर

कोरोना की वजह से दुनिया के ज्यादातर देशों में आवाजाही पर बैन है । इसका असर भी दुनिया के बाजार पर पड़ रहा है । आउटवार्ड डाइरेक्ट इंवेस्टमेंट के मुताबिक अंगोला जितने तेल का उत्पादन करता है उसका 60 फीसदी चीन को निर्यात करता है । लेकिन आयात-निर्यात पर असर पड़ रहा है जिससे इकोमॉमी पर भारी असर पड़ रहा है । कोरोना की वजह से अफ्रीका में कई देशों में खाद्य संकट पैदा हो सकती है अफ्रीका हर साल 35 अरब डॉलर की कीमत का खाने का सामान आयात करता है। COVID -19 की वजह से पैदा हुई ग्लोबल रिसेशन की स्थिति का असर सप्लाई चेन पर हो रहा है और इससे आयात अधिक महंगा होता जा रहा है और निर्यात के माध्यम से पैसा बहुत कम मिलेगा।

प्राइवेट सेक्टर में नौकरी जानी तय

कोरोना संक्रमण में नौकरी की स्थिति भी संक्रमण जैसी ही है । लॉकडाउन नहीं नॉकडाउन सीधे किया जा रहा है । भले पीएम मोदी बार-बार अपील कर रहे है कि अपने स्टाफ को नौकरी से ना हटाएं लेकिन सुनता कौन है । आईटी सेक्टर, मीडिया में मंदी का बहाना बनाकर कॉस्ट कटिंग का दौर शुरू हो चुका है । वहीं संयुक्त राष्ट्र ने भी चेतावनी दी है कि दुनिया भर में कोरोना की महामारी 2.5 करोड़ लोगों का रोजगार छीन लेगी । इससे वैश्विक अर्थव्यवस्था को 3.6 लाख करोड़ डॉलर का झटका लगेगा। संयुक्त राष्ट्र ने कहा कि इससे आर्थिक और श्रम संकट गहराएगा।

ऐसे में देखें तो कोरोना फिलहाल जान ले रहा है और आने वाले समय बचे लोगों की नौकरी लेने का काम करेगा । अगर इसे यूं कहे तो कोरोना फिलहाल तड़पा रहा है आनेवाले समय में तरसाएगा।

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