कोरोना के खिलाफ लड़ाई को बड़ा झटका, मुंबई में हजारों लोगों ने लॉकडाउन की धज्जियां उड़ाई

आज ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने लॉकडाउन को 3 मई तक बढ़ाया, 20 अप्रैल तक सख्ती बरतने की बात कही लेकिन पीएम के संबोधन के कुछ ही घंटों के भीतर कोरोना का सबसे ज्यादा कहर झेल रही मुंबई से इसकी बिल्कुल उल्टी तस्वीर तब नज़र आई जब हजारों के संख्या में प्रवासी मजदूरों की भीड़ बांद्रा स्टेशन पर पहुंच गई.

हमें बस घर जाने दो

बांद्रा के रेलवे स्टेशन पर जो भीड़ उमड़ी उसका यही कहना था कि उन्हें यहां खाने पीने की बहुत दिक्कत हो रही है लिहाजा उन्हें किसी भी तरह घर जाने दिया जाये. कोरोना से बुरी तरह प्रभावित मुंबई में इस तरह से अचानक भीड़ का उमड़ आना काफी डराने वाला है और इससे कोरोना फैलने का खतरा और भी ज्यादा बढ़ गया है.

पुलिस ने भीड़ को खदेड़ा

हालांकि इतनी सारी भीड़ एक साथ बांद्रा रेलवे स्टेशन पर कैसे पहुंची ये बात अपने आप में हैरान करने वाली है भीड़ के रूप में इकट्ठा हुए ज्यादातर लोग दूसरे राज्यों से रोजी रोटी की तलाश में मुंबई आए वो कामगार थे जिन्हें लॉकडाउन के बाद बुरे हालात से गुजरना पड़ रहा है, हालांकि इतनी भीड़ के इकट्ठा होने के बाद पुलिस ने वहां पहुंचकर लाठी चार्ज किया जिसके बाद से लोग तितिर बितर हो गए.

लॉकडाउन की मियाद बढ़ने से टूटा सब्र

दरअसल महाराष्ट्र समेत तमाम राज्यों में दूसरे राज्यों से गए कई प्रवासी मजदूर फंसे हुए हैं सबको उम्मीद थी कि 21 दिन के लॉकडाउन के बाद उनके वापस अपने घर लौटने का रास्ता साफ हो जाएगा लेकिन लॉकडाउन की मियाद फिर 19 दिन ब़ढ़ने के बाद मुंबई के इन कामगारों का धैर्य जवाब दे गया और लोग अपने-अपने घर लौटने के लिए निकल पड़े.

सरकार ने दिया भरोसा

इस बीच महाराष्ट्र के गृहमंत्री अनिल देशमुख ने लोगों को भरोसा दिया है कि सरकार मजदूरों के खाने पीने का पूरा इंतजाम करेगी उन्होंने कहा कि वो मजदूरों को समझा रहे हैं कि उनके हालात को सुधारने के लिए सरकार कोई कोर कसर बाकी नहीं रखेगी और उन्हें हर संभव मदद दी जाएगी.

शिवसेना का केन्द्र पर निशाना
वहीं इस इस तरह लॉकडाउन के दौरान भीड़ जुटने पर अब राजनीति भी शुरू हो गई है उद्धव सरकार में मंत्री आदित्य ठाकरे ने इस घटना के लिए केन्द्र सरकार को जिम्मेदार ठहराया आदित्य ठाकरे ने ट्वीट करके कहा कि- बांद्रा में इकट्ठा हुए लोग अब चले गए हैं, लेकिन यह स्थिति इसलिए बनी क्योंकि केंद्र सरकार ने उनकी बात नहीं सुनी। महाराष्ट्र में 6 लाख लोग शेल्टर होम में रह रहे हैं। केंद्र सरकार के सामने मुद्दा रखा गया था कि इन लोगों को घरों तक पहुंचने की कोशिश की जाए। उनके पास खाना नहीं है और वे घर जाना चाहते हैं। वहीं बीजेपी ने कहा कि शिवसेना मजदूरों के लिए इंतजाम नहीं कर पाई इसलिए ये लोग सड़कों पर उतर आए.

कोरोना का एपिसेंटर बना महाराष्ट्र
महाराष्ट्र देश में कोरोना का एपिसेंटर बनकर सामने आया है यहां अब तक कोरोना के 2300 से ज्यादा मामले सामने  चुके हैं इसमें से 217 मरीज ठीक हो चुके हैं और कोरोना के चलते 160 लोगों की मौत हो चुकी है। मुंबई में मंगलवार को कोरोना के 204 नए मामले सामने आए और 11 लोगों की मौत हुई है. जैसा आज मुंबई के बांद्रा में हुआ वैसी ही लाखों की भीड़ कुछ दिन पहले दिल्ली के आनंदविहार बस अड्डे पर घर जाने के लिए उमड़ आई थी.

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