पालघर साधु हत्या कांड के वकील की सड़क दुर्घटना में मौत, क्या ये हादसा है या साजिश?

महाराष्ट्र के पालघर लिंचिंग केस साधुओं का केस लड़ रहे वकील की सड़क हादसे में मौत हो गई है। जिसे लोग हादसा नहीं बल्कि हत्या करार दे रहे हैं। बुधवार को पालघर लिचिंग केस में वकील के एक सहयोगी दिग्विजय त्रिवेदी अपनी कार से कोर्ट की तरफ जा रहे थे। तभी मुंबई-अहमदाबाद हाइवे के पास उनकी कार सड़क हादसे का शिकार हो गई

संतो को न्याय दिलाने के लिए दिन रात एक कर चुके वकील दिग्विजय त्रिवेदी की मौत पर लोग सवाल उठा रहे हैं। शुरुआती जानकारी के मुताबिक पालघर साधु लिंचिंग केस के वकील की गाड़ी टायर फटने से पलट गई और दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

वकील त्रिवेदी मुंबई-अहमदाबाद हाइवे पर अपने साथियों के पीछे-पीछे चल रहे थे । इस बीच वकील दिग्विजय त्रिवेदी के साथियों ने जब उनकी गाड़ी आते हुए नहीं देखी, तो वो वापस लौटे तो देखा की वकील त्रिवेदी की कार के परखच्चे उड़ चुके थे।

ये हादसा मुंबई-अहमदाबाद हाईवे पर मनोर में मेंडवान ब्रिज के पास हुआ। जिस समय यह हादसा हुआ, उस समय त्रिवेदी ही गाड़ी चला रहे थे और इसी दौरान कार का नियंत्रण खोया और गाड़ी पलट गई, जिस कारण त्रिवेदी की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं दुर्घटना में वकील के बगल में बैठी महिला के भी गंभीर रूप से घायल होने की खबर है। हालांकि महिला कौन हैं, उनकी पहचान अभी नहीं हो पाई है।

पालघर के वकील की मौत के बाद ट्विटर पर सवाल उठाया जा रहा है। महाराष्ट्र सरकार, महाराष्ट्र डीजीपी और पालघर पुलिस को टैग करके पूछा जा रहा है कि बड़े पैमाने पर होने वाली लिंचिंग में किस-किस का हाथ है? क्या ये सब योजनाबद्ध है? विश्व हिंदू परिषद के प्रवक्ता विनोद बंसल ने ट्वीट कर इस घटना की जांच की मांग की।

कब हुआ पालघर हत्याकांड

16 अप्रैल को जूना अखाड़े के दो साधु- 35 साल के सुशील गिरि महाराज और 70 साल के चिकणे महाराज कल्पवृक्षगिरि, अपने ड्राइवर नीलेश के साथ मुंबई के कांदिवली से गुजरात के सूरत जा रहे थे। दोस्त के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए निकले साधुओं की कार को गड़चिंचले गांव में पुलिस ने रोका। वहीं पर अचानक भीड़ इकट्ठा हो गई और तीनों को बुरी तरह पीटा कर हत्या कर दी गई।

मॉब लिंचिंग की इस घटना में पालघर पुलिस ने अगले दिन 101 लोगों को गिरफ्तार किया और नौ नाबालिगों को हिरासत में लिया। वहीं बहुत से लोग पुलिस के बचने के लिए जंगल की तरफ भाग गए. मामले की जांच CID को सौंप दी गई। तब से अभी तक CID की टीम बीच-बीच में गिरफ्तारियां कर रही है। 13 मई को भी 6 लोगों की गिरफ्तारियां हुईं।

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