कोरोना के सामने केजरीवाल का सरेंडर ! मुंबई से दोगुनी हुई रफ्तार, मरीज छोड़िए शवों का भी बुरा हाल

कोरोना महामारी के दौरान दिल्ली अब तक के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है. दिल्ली में कोरोना का ग्राफ तेजी से बढ़ता जा रहा है. अगर किसी को करोना संक्रमण हो गया तो उसके लिए अस्पतालों में जगह नहीं है और किस्मत से अगर अस्पताल में जगह मिल भी गई तो वहां भयानक बदइंतजामी नजर आ रही है जिसे देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी दिल्ली सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.

कोरोना की भयंकर रफ्तार

दिल्ली में कोरोना वायरस ने बीते एक हफ्ते से भयानक रफ्तार पकड़ ली है। शुक्रवार को यहां नए मामलों की संख्‍या ने पुराने सारे रिकॉर्ड्स तोड़ दिए। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार को दिल्‍ली में 2,137 लोग पॉजिटिव  पाए गए और दिल्‍ली में कोविड-19 के मरीजों की संख्‍या 36,824 पहुंच गई. दिल्ली में शुक्रवार को 129 लोगों की मौत हुई. अब तक कोरोना से यहां 1214 लोग जान गंवा चुके हैं.

मुंबई से दोगुनी रफ्तार

दिल्ली में कोरोना का ग्राफ मुंबई से दोगुना तेजी से ऊपर चढ़ रहा है पिछले 15 दिन के आंकड़ों को देखें तो दिल्‍ली और चेन्‍नई में मुंबई से दोगुनी रफ्तार से कोरोना के मामले सामने आए हैं। दिल्‍ली में तो अहमदाबाद से तीन गुना तेजी से कोरोना के मरीज बढ़े हैं।

दिल्ली के डराने वाले आंकड़े

दिल्‍ली में 28 मई के बाद से रोज 1,000 से ज्‍यादा नए मामले सामने आ रहे हैं। सिर्फ 1 जून को 1,000 से कम केस आए थे। दिल्‍ली के स्‍वास्‍थ्‍य मंत्री सत्‍येंद्र जैन ने कहा है कि मरीजों के लिए ‘बेड्स और वेंटिलेटर्स बढ़ाए जाएंगे।’ उन्‍होंने केंद्र सरकार से भी मदद मांगी है। अस्पतालों की कमी को देखते हुए अब दिल्ली सरकार स्‍टेडियम, बारात घर, कम्‍युनिटी हॉल्‍स और धर्मस्‍थलों को अस्थायी अस्‍पताल के तौर पर इस्‍तेमाल करेगी।

अस्पतालों का बुरा हाल

दिल्ली में कम्युनिटी स्प्रेड की हालत है और फिलहाल बड़े बड़े दावे करने वाले केजरीवाल और उनकी सरकार कोरोना के सामने सरेंडर जैसे हालात में दिख रहे हैं. कोरोना मरीजों की मौत के बाद उनके शव के रखरखाव के तरीके पर सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार पर सख्त टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि दिल्ली में और उनके अस्पतालों में बहुत बुरा हाल है।

मरीजों के साथ बुरा बर्ताव?

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार पर सख्त टिप्पणी करते हुए कहा है कि अस्पतालों में मरीजों के साथ जानवरों जैसा बर्ताव किया जा रहा है. दिल्ली में जो स्थिति है वह भयानक व डरावनी है। अदालत ने कहा कि अस्पतालों में हर जगह बॉडी फैली हुई है और लोगों का वहां इलाज चल रहा है।

परिवारों को नहीं मिल रही लाश

दिल्ली में मौत का आंकड़ा छुपाने के लिए परिवारों को लाशें तक नहीं दी जा रही हैं. ऐसे कई मामले सामने आ चुके हैं. सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा है कि दिल्ली में कोरोना मरीज की मौत के बाद उनके परिजनों को इस बारे में सूचना देने की भी जहमत नहीं उठाई जा रही है। कई ऐसे मामले दिखे हैं जिनमें परिजन अपनों की मौत के बाद उनके अंतिम संस्कार तक में शामिल नहीं हो पाए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से इस मामले में जवाब दाखिल करने को कहा है।

दिल्ली में टेस्ट कम क्यों ?

दिल्ली सरकार पर शुरु से ही टेस्टिंग कम कराने का आरोप लगाए जा रहे हैं. अब कोर्ट ने भी पूछा है कि दिल्ली सरकार कोरोना टेस्ट को कम क्यों कर रही है। क्या सरकार बनावटी फिगर चाहती है। कैसे टेस्ट को कम किया गया? राज्य की ड्यूटी है कि वह टेस्टिंग को बढ़ाए।

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