DRDO ने बनाई कोरोना ‘किलिंग मशीन’, इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, कागज, करेंसी नोट पर नहीं टिकेगा वायरस !

देश में कोरोना का संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। जिसे देखते हुए डिफेंस मिनिस्टरी ने सेफगार्ड को बढ़ाने के मकसद से एक बेहद उपयोगी सिस्टम डेवल्प किया है । जिससे कोरोना को आसानी से हराने में सफलता मिलेगी क्योंकि छोटी-छोटी चीजों का ध्यान ना देने से कोरोना का इंफेक्शन कई गुणा तेजी से बढ़ रहा है ।

इसे देखते हुए डिफेंस मिनिस्टरी ने कहा कि रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन ( DRDO ) ने अल्ट्रावायलेट सैनेटाइजेशन कैबिनेट बनाया है जो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट, नोट और कागज को आसानी से सैनेटाइज करेगा । यह एक स्वचालित और संपर्करहित मशीन है । इस मशीन को किलर कोरोना के खिलाफ रक्षा कवच बताया जा रहा है ।

हैदराबाद लैब में बना DRUBS

डीआरडीओ ने इस सुरक्षित मशीन को ऐसे समय में विकसित किया है जब देश कोरोना वायरस से जंग में दिन रात लगा हुआ है । इसे हैदराबाद के रिसर्च सेंटर इमारत ने विकसित किया है, जिसे डिफेन्स रिसर्च अल्ट्रावायोलेट सेनेटाइज़र (DRUBS ) नाम दिया गया है। डीआरयूवीएस कैबिनेट में संपर्करहित संचालन करने की सुविधा है लिहाजा वायरस के संक्रमण को रोकने में खासा उपयोगी है

DRUBS के अहम फायदे

जैसा कि हम आपको बता चुके हैं कि DRUBS संपर्क रहित यानी बिना छूए काम करने में सक्षम है । लिहाजा ये कोरोना से बचाने के लिए मोबाइल फोन, आईपैड, लैपटॉप, करेंसी नोट, चेक, चालान, पासबुक, कागज, लिफाफे को आसानी से जांच कर लेता है साथ ही इसके सेंसर स्विच में दराज को खोलने और बंद करने की सुविधा है । इन सब सुविधाओं से लैस होने की वजह से इसका संचालन बेमिसाल हो गया है ।

नोटों की गिनती की खास तकनीक

RCI ने एक स्वचालित यूवीसी करेंसी नोट सैनिटाइजिंग इंस्टूमेंट को डेवल्प किया और इसका नाम नोट्स क्लीन दिया है। इसे इस्तेमाल से नोटों के बंडलों को डिसइंफेक्ट किया जा सकता है, हालांकि इसका इस्तेमाल करते हुए हरेक करेंसी नोट को डिसइंफेक्ट करने की प्रक्रिया टाइम टेकिंग थी । लेकिन DRDO ने इस खामी को दूर कर एक सेनेटाइजिंग तकनीक विकसित किया है जिससे तहत इंस्टूमेंट के इनपुट स्लॉट में नोटों के बंडल को खुले रखना होगा, ताकि जल्द गिनती हो पाए ।

DRUBS कैसे है कीटाणुनाशक ?

दरअसल डीआरडीओ ने इसे कीटाणुमुक्त करने के लिए डिजाइन किया है। डिफेंस रिसर्च अल्ट्रावायलेट सेनेटाइजर सिस्टम कैबिनेट के अंदर रखी चीजों पर 360 डिग्री से पराबैंगनी किरणें ( अल्ट्रावायलेट रेज एक्सपोजर) डालता है।जिससे चीजों को कीटाणुमुक्त करने की प्रक्रिया खत्म होने के बाद सिस्टम स्लीप मोड में चला जाता है । इसलिए संचालन करनेवाले को इस इंस्टूमेंट के पास खड़ा रहकर इंतजार नहीं करना होता है । तो वाकई संक्रमण काल में डीआरडीओ ने जीवन रक्षक कवच बनाया है ।

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