कोरोना संकट और भूख से तड़पती ज़िंदगी : देवदूत बन सामने आए स्थानीय लोग

कोरोना ने ज़िंदगी की रफ़्तार पर ब्रेक लगा दिया है । देश और दुनिया में सभी कुछ ठप है । ऐसे में इस महामारी का बहुत बड़ा असर मज़दूरों पर हुआ है जो इस लॉकडाउन की वजह से दूसरे राज्यों में फंसे हुए हैं । मज़दूरों की दयनीय हालातों को बयां करते उनकी बेबसी के वीडियो और खबरें पूरे देश में वायरल हैं ।

मदद के लिए देवदूत बने स्थानीय लोग

पलायन करते मज़दूरों के बीच अभी भी लाखों लोग देश के दूसरे हिस्सों में फंसे हुए हैं । ऐसे भूखे और लाचार लोगों की मदद में स्थानीय लोग देवदूत बन कर सामने आए और खुद से पहल कर इन बेसहारा लोगों की ज़रूरत के लिए पब्लिक फंडिंग की मदद से राहत अभियान शुरू किया ।

मदद करते लोग

ऐसी ही एक मदद की शुरुआत बिहार के औरंगाबाद में कुटुंबा प्रखंड के सैकड़ों गॉवों में हुई । भूख से लाचार लोगों के बीच एक संस्था अम्बे सेवा समिति के माध्यम से प्रतिदिन भोजन सामग्री बांटी जा रही है । सेवा समिति के अध्यक्ष ससमाजसेवी प्रवीण कुमार ने कहा कि हमारा ये अभियान लॉकडाउन खत्म होने तक चलता रहेगा । कोरोना इंफेक्शन के खतरों के बावजूद समिति कुटुंबा प्रखंड के सभी पंचायत के गांवों तक भोजन सामग्री उपलब्ध कराएगी ।

राहत सामग्री वितरण

अबतक 2000

खबरों के अनुसार प्रखंड के 35 गांवों के लाचार और मज़बूर 2000 लोगों के बीच भोजन और दूसरे राहत सामग्रियों को वितरित किया जा चुका है , और ये सिलसिला बदस्तूर जारी है ।

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