‘महात्मा’ सोनू सूद को सैल्यूट पर भड़की शिवसेना, सामना में बताया बीजेपी का ‘प्यादा’

सोशल मीडिया और टीवी पर इस वक्त बॉलीवुड एक्टर सोनू सूद छाये हुए हैं. देशभर में उनकी हर तरफ तारीफ हो रही है क्योंकि लॉकडाउन के दौरान वो प्रवासी मजूदरों के मसीहा बनकर उभरे हैं. लेकिन शिवसेना को सोनू की ये तारीफ रास नहीं आ रही है. शिवसेना ने सोनू सूद पर अपने मुखपत्र सामना के जरिए निशाना साधा है. शिवसेना ने कहा है कि सोनू सूद बीजेपी के इशारे पर महाराष्ट्र की उद्धव सरकार को नीचा दिखाने की कोशिश कर रहे हैं.

सोनू पर बरसे संजय राउत

शिवसेना नेता संजय राउत ने अपने आर्टिकल में सोनू सूद पर कई सवाल उठाये हैं. संजय राउत ने सामना में लिखा है कि कितनी चतुराई के साथ किसी को एक झटके में महात्मा बनाया जा सकता है। संजय राउत ने सवाल पूछा है कि सोनू सूद आखिर कैसे बिना किसी राजनीतिक दल के लोगों तक मदद पहुंचा रहे हैं ? महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सोनू सूद को जो बधाई दी है उस पर भी शिवसेना ने सवाल उठाए हैं.

बीजेपी का प्यादा

संजय राउत ने सोनू सूद के अच्छे कामों को सियासत से प्रेरित बताया है संजय राउत ने लिखा है कि सोनू सूद एक अभिनेता हैं जो पैसे लेकर कुछ भी कर सकते हैं, राउत ने आरोप लगाया है कि बीजेपी के नेताओ ने सोनू सूद को प्यादा बनाकर ठाकरे सरकार को नाकाम दिखाने की कोशिश की है. 

सोनू पर महात्मा वाला तंज

रविवार को शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में संजय राउत ने अपने कॉलम मे लिखा कि-  ‘लॉकडाउन के दौरान आचानक सोनू सूद नाम से नया महात्मा तैयार हो गया। इतने झटके और चतुराई के साथ किसी को महात्मा बनाया जा सकता है?  उन्होंने आगे लिखा कि- ‘कहा जा रहा है कि सोनू सूद ने लाखों प्रवासी मजदूरों को दूसरे राज्यों में उनके घर पहुंचाया। यानी केंद्र और राज्य सरकार ने कुछ भी नहीं किया। इस काम के लिए महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी महात्मा सूद को शाबाशी दी।’

राउत पर भड़की बीजेपी

संजय राउत के इस लेख के बाद बीजेपी उन पर भड़क गई है. बीजेपी नेता रामकदम ने कहा कि कोरोना के संकट काल में इंसानियत के नाते सड़क पर उतरकर मजदूरों की सहायता करने वाले सोनू सूद पर संजय राउत का बयान दुर्भाग्यपूर्ण है। उनकी खुद की सरकार कोरोना से निपटने में नाकाम हो गई। यह सच्चाई सोनू सूद पर आरोप लगाकर छिप नहीं सकती। राम कदम ने कहा कि- ‘जिस काम की सराहना करने की आवश्यकता है, उस पर भी आरोप?’

सोनू से क्यों नाराज हुई शिवसेना ?

सवाल ये है कि आखिर सोनू सूद पर शिवसेना क्यों भड़की हुई है. दरअसल सोनू सूद को इस वक्त महाराष्ट्र में मसीहा के तौर पर देखा जा रहा है हर कोई उनके काम की तारीफ करते नहीं थक रहा. ये कहना भी शायद गलत ना होगा कि घर लौटने वालों को राज्य सरकार से ज्यादा सोनू सूद पर भरोसा है. नेता-अभिनेता सभी एक सुर से सोनू सूद की तारीफ कर रहे हैं हाल ही में उत्तराखंड के सीएम त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने सोनू सूद से फोन पर बात करके उनकी तारीफ की तो महाराष्ट्र के राज्यपाल ने भी सोनू सूद का आभार जताया. लगता है यही बात सत्ताधारी शिवसेना को अखर गई.

अच्छे काम पर भी सियासत

लॉकडाउन के बीच प्रवासी मजदूरों की पुकार सुनकर सोनू सूद ने अपने दम पर परेशान मजदूरों को घर भेजने की एक मुहिम शुरु की. सोनू की ये मुहिम रंग लाई, उन्होंने कभी बस से , कभी ट्रेन से तो कभी हवाई जहाज से प्रवासी लोगों को उनके घर तक पहुंचाने का नेक काम किया जो अब भी बदस्तूर जारी है लेकिन सोनू सूद के इस नेक काम को भी सियासत ने अपने लपेटे में ले लिया. शिवसेना के मुखपत्र में जो भी बातें कही गई हैं अब उन पर राजनीतिक आरोप- प्रत्यारोप और टीवी पर डिबेट जोर पकड़ेगी यानी ये मामला और तूल पकड़ेगा ऐसे में डर है कि एक अच्छी मुहिम राजनीति की भेंट ना चढ़ जाए. ऐसे में सवाल यही है कि जब कुछ अच्छा हो रहा है तो क्या उस पर भी सियासत जरुरी है.

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