गलवान में चीनी सेना के उखड़े तंबू….हो गया गेमओवर!, बैकफुट पर गई जिनपिंग की सेना

हिंदुस्तान की ताकत के आगे चीन को आखिरकार घुटनों के बल आना ही पड़ा। जो चीन लगातार गलवान में गदर मचाने की साजिश रच रहा था। वो चीन आखिरकार हिंदुस्तान की हुंकार सुनकर पीछे हटने को मजबूर हो गया है। गलवान घाटी में चीनी सेना 2 किलोमीटर पीछे हट गया है। और गलवान पर झूठा दावा करने वाले चीन की हेकड़ी इस बार भी काम नहीं आई है।

हिंदुस्तान के दम से डरा ‘ड्रैगन’

गलवान घाटी में भारत और चीन के बीच चल रहे तनाव के बीच चीन ने झुकते हुए गलवान घाटी में संघर्ष वाली जगह से दो किलोमीटर पीछे अपने सैनिकों और सैनिकों के कैंप को पीछे हटा लिया है। चीन के विदेश मंत्रालय ने खुदगलवान में चीनी सैनिकों के पीछे हटने की खबर की पुष्टि कर दी है।

हिंद का दम, चीन बेदम

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजियान ने कहा कि भारत और चीन के सैन्‍य कमांडरों के बीच बातचीत हुई है और तनाव को घटाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं।

NSA अजित डोभाल के चक्रव्यूह में उलझा ‘ड्रैगन’

दरअसल रविवार को उस वक्त गलवान में चीन के पीछे हटने की स्क्रिप्ट लिखी गई। जब राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री और स्टेट काउंसिलर वांग वाई के बीच फोन पर बातचीत हुई। इस बातचीत के दौरान जोर दिया गया कि लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल पर पूरी तरह से शांति और स्थिरता को बहाल किया जाए। दोनों पक्षों की तरफ से साथ मिलकर काम करने पर भी जोर दिया गया है। आने वाले समय में इस तरह की घटनाओं से बचने पर भी बात हुई।

2 किलोमीटर पीछे हटी चीनी सेना

आपको बता दें कि बता दें कि दोनों देश तनाव को कम करने के लिए कई दौर की कमांडर स्तर की बातचीत कर चुके हैं। गलवान घाटी पेट्रोलिंग पॉइंट 14 वो जगह है जहां भारत और चीन के सैनिकों के बीच संघर्ष हुआ था और अब इस जगह से चीने ने अपने कदम पीछे खींचने शुरू कर दिए हैं।

15 जून की रात को चीन ने की थी मक्कारी

पीपी यानी पेट्रोलिंग प्वाइंट-14 पर भारतीय सेना और चीन की सेना के बीच झड़प हुई थी। 15 जून की रात भारत और चीन के जवानों के बीच खूनी संघर्ष हुआ था। जिसके बाद से ही गलवान पर तनातनी नजर आ रही थी। लेकिन अब लद्दाख की गलवान घाटी में चीनी सैनिक डिसइंगेजमेंट प्रक्रिया के तहत करीब 2 किमी पीछे हटने से पूरे मामले में ना सिर्फ भारत की बड़ी जीत हुई है। बल्कि दुनिया को दादागीरी दिखाने वाले चीन को अपनी हैसियत भी समझ में आ गई है।

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