चांद पर छिपे ‘खजाने’ पर टिकी अमेरिका की निगाहें, प्राइवेट कंपनियों को दी माइनिंग की इजाजत

अब वो दिन दूर नहीं जब धरती पर चांद से लाए गए हीलियम से गाड़िया चलेंगी। ये भी मुमकिन है कि चांद से लाए गए गोल्ड और डायमंड महिलाओं के खूबसूरती में चार चांद लगाएं। ये कोई साइंस फिक्शन नहीं बल्कि हकीकत है। दरअसल प्रेसीडेंट ट्रंप ने अंतरराष्ट्रयी मून ट्रीट्री मानने से इनकार कर दिया है। ट्रंप ने कई प्राइवेट कंपनियों को चांद पर माइनिंग करने की इजाजत दे दी है।

ट्रंप के फैसले से रूस और चीन चिढ़े

अमेरीकी राष्ट्रपति ने हाल ही में एक एग़्जिक्यूटिव ऑर्डर पर दस्तख़त किए हैं,  जिसमें ये कहा गया है कि अमरीका को अंतरिक्ष में उपलब्ध संसाधनों को तलाशने और उसके इस्तेमाल का हक़ है। हालांकि ट्रंप के इस फैसले से चीन और रूस चिढ़ गए हैं।

ताकतवर देशों को बादशाहत खोने का खतरा

दरअसल दुनिया में रेयर मेटल की सप्लाई में चीन अव्वल है और इसके बाद रूस का नंबर आता है। अमेरिका तमाम तकनीक श्रेष्ठता रखने के बावजूद, खनिज संसाधन से दूर है। ऐसे में वो लंबे वक्त से ऐसी जगहों की तलाश में रहा है जहां रूस और चीन की पहुंच न हो और अमेरिका की ये तलाश चांद पर जाकर खत्म हो गई सी लगती है।

1979 की ‘मून ट्रीटी’ से अलग है अमेरिका

दरअसल अंतरिक्ष के संसाधनों के दोहन के लिए मून ट्रीट्री काफी अहम मानी जाती है। 1979 में  मून ट्रीट्री पर दुनिया के करीब-करीब सभी देशों ने दस्तखत किया था। लेकिन अमेरिका ने 1979 की ‘मून ट्रीटी’ को कभी साइन ही नहीं किया। इस समझौते के तहत स्पेस में किसी भी तरह के काम के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन होना चाहिए।

2015 में अमेरिकी संसद ने खनन की इजाजत दी थी

साल 2015 में अमेरिका की संसद कांग्रेस ने एक कानून पास करके अमेरिकी कंपनियों को चांद और ऐस्टरॉइड के खनन संसधानों की इजाजत दे दी। अब सवाल है कि आखिर वो कौन से मेटल है जिनकी कमी से अमेरिका परेशान है। या फिर जिसपर कब्जे के लिए अमेरिका चांद को भी खोद डालने की प्लानिंग कर रहा है।

हीलियम, लिथियम पर अमेरिका की नजरें

जानकारों के मुताबिक हीलियम, लिथियम और कोबाल्ट वो खनिज हैं जिनपर अमेरिका की निगाह है।चांद पर हीलियम, लिथियम और कोबाल्ट का अथाह भंडार है। ये खनिज एटमी और सोलर एनर्जी तकनीक के लिए काफी अहम है। यानी साफ है कि भविष्य की ऊर्जा ज़रूरतों के लिए अमेरिका चांद को खोद डालने की प्लानिंग कर रहा है। जैसे इलेक्ट्रीक कार सेल बनाने के लिए लीथियम और कोबाल्ट काफी अहम हैं और दुनिया में ये खनिज सिर्फ रूस,चीन और कांगो के पास मौजूद है।

फिलहाल आसान नहीं होगा चांद पर खजाना ढूंढना

हालांकि बहुत से एक्सपर्ट का दावा है कि अमेरिका की ये उठापटक जल्दबाजी भरा कदम है। मौजूदा तकनीक की मदद से चंद्रमा पर खनन का काम दूर की कौड़ी है। मून पर माइनिंग में अभी कम से कम 10 से 15 साल लगेंगे और वो भी इस बात पर निर्भर करेगा कि इसमें कितना पैसा और संसाधन खर्च होगा।

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