हिंदुस्तान में कोरोना का कैसे होगा गेम ओवर, कहां बना वायरस को मारने वाला वैक्सीन?

कोरोना के संक्रमण के कोहराम के बीच एक अगर कोई अच्छी खबर मिलती है तो लगता है कि मानो इस जानलेवा बीमारी की संजीनवी बूटी मिल गई। इस बीच भारत में भी एक कंपनी ने कोरोना को हराने के लिए वैक्सीन विकसित करने का दावा किया है । इससे पहले चीन, अमेरिका फिर ब्रिटेन ने भी कोरोना का वैक्सीन विकसित करने का दावा किया । लेकिन भारत के दावे का मतलब है कोरोना का अंत तुरंत ।

वैक्सीन पर चीन का दावा

जिस मुल्क से फैले कोरोना ने दुनिया को तबाह कर दिया है उसी चीन ने दावा किया है कि उसकी मिलिट्री अकादमी और चाइनीज अकादमी ऑफ इंजीनियर ने मिलकर कोरोना का वैक्सीन बना लिया है। इसको फिलहाल Ad5-nCoV नाम दिया गया है। इसके क्‍लीनिकल ट्रायल के लिए करीब 108 वोलेंटियर्स की मदद ली गई है। ये सभी लोग 18 साल से लेकर 60 साल तक की उम्र है। सभी लोगों को 3 ग्रुप में बांटा गया है और दवा की अलग-अलग डोज दी जा रही है और एंटी बॉडी विकसित होने पर इसके आगे की प्रक्रिया शुरू होगी ।

वैक्सीन पर यूएस का दावा

करीब 25 दिन पहले अमेरिका ने कोरोना वैक्सीन पर दावा करके सबको चौंका दिया । खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि कोरोना के वैक्सीन का फेज-वन क्लिनिकल ट्रायल सफल हैं। दरअसल अमेरिका के सिएटल में कोरोना वायरस के वैक्सिन का चार लोगों पर टेस्ट किया गया है। इसमें एक महिला है 43 साल की जैनिफर हॉलर , वो सिएटल के एक टेक कंपनी में मैनेजर है। जैनिफर के साथ इनके अलावा तीन और लोगों को इस परीक्षण का इंजेक्शन लगाया जाना है। इसके अलावा 45 अन्य लोगों को भी इसका हिस्सा बनाया जाएगा और इन्हें एक महीने के बाद इंजेक्शन दो और डोज दिए जाएंगे। 

ब्रिटेन का वैक्सीन पर दावा

इंग्लैंड की ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी ने कोरोना वायरस का वैक्सीन बनाकर के क्लिनिकल ट्रायल के लिए लोगों की तलाश शुरू कर दी है । इस परीक्षण के लिए यूनिवर्सिटी ने जेनर इंस्टीट्यट और ऑक्सफोर्ड वैक्सीन ग्रुप के साथ करार किया है । शोध के लिए 500 वॉलेंटियर्स की जरूरत सूत्रों के मुताबिक इस प्रोजेक्ट के लिए करीब 500 वॉलेंटियर्स की जरूरत है ताकि उन पर स्टडी किया जा सके। जिन्हें ChAdOx1 SoV-19 का इंजेक्शन दिया जाए और फिर कम्प्रेटिव स्टडी और कंट्रोल्ड इंजेक्शन देकर सेहत पर नजर रखा जा रहा है । इंग्लैंड के थेम्स वैली में 18 से 55 साल के लोगों पर इस वैक्सीन की स्क्रीनिग शुरू कर दी गई है। साथ ही अब जानवरों पर इसका परीक्षण शुरू किया गया है ।

भारत का वैक्सीन पर दावा

भारत ने कोरोना को हराने की ठान ली है । हर स्तर पर सकारात्मक कोशिशें जारी है । इसी कड़ी में हैदराबाद की टीका कंपनी भारत बायोटेक ने कोरोना की इलाज के लिए वैक्सीन विकसित कर लिया है। भारत में इसका ह्यूमन ट्रायल जल्द होगा । 2020 खत्म होने से पहले यह वैक्सीन इस्तेमाल के लिए उपलब्ध हो सकता है । कंपनी ने यहां तक कहा कि ये वैक्सीन नेजल ड्रॉप होगा जिसे नाक में डालनी होगी । इस वैक्सीन के बारे में दावा करने वाली कंपनी ने वैक्सीन का नाम ‘कोरोफ्लू’ रखा है ।

क्यों पड़ेगा नाक में वैक्सीन ?

भारत बायोटेक के एमडी डॉ कृष्णा के मुताबिक कोरोना नाक के रास्ते ह्यूमन बॉडी मे पहुंचता है इसलिए इसके वैक्सीन को नाक के रास्ते लंग्स तक पहुंच जाएगा । इससे गांव तक के लोग आसानी से इस्तेमाल करने में सक्षम होंगे । इतना ही नहीं एक बोतल में 10 से 20 बूद तक ही वैक्सीन की डोज होगी । कंपनी ने कहा कि वो हर साल 30 करोड़ डोज बनाएगी ।

वैक्सीन पर विदेश में चल रहा है रिसर्च

भारत बायोटेक कंपनी के एमडी का दावा है कि भारत में रेस्पिरेट्री पैथोलॉजी रिसर्च में कोई स्पेशलाइजेशन नहीं है । देश में एनिमल ट्रायल और जीन सिंथेसिस सुविधा न होने से वैक्सीन का एनिमल ट्रायल यूएस में कराना पड़ रहा है। इसके लिए दुनिया के सबसे फेमस जापानी वायरोलॉजिस्ट योशीहीरो कवाओका और अमेरिका के विस्कॉन्सिन मेडिसन यूनिवर्सिटी के साथ गठजोड़ किया है । योशीहीरो फ्लू वैक्सीन के वर्ल्ड अथॉरिटी हैं और यूनिवर्सिटी की इंफ्लूएंजा रिसर्च लैब में एनिमल ट्रायल के लिए हाईलेवल बायोसेफ्टी फैसलिटी मौजूद है । योशीहोरो ने M2SR नाम का टीका विकसित किया है जो शरीर में फ्लू के खिलाफ प्रतिरोधक क्षमता पैदा करता है । लैब में M2SR में ही SARS CoV-2 का जीन सीक्वेंस भी जोड़ गया । SARS CoV-2 ही वह वायरस है जो COVID-19  के संक्रमण की वजह है । अगर सब कुछ ठीक ठाक रहा हो तो कोरोना वायरस का वैक्सीन ‘कोरोफ्लू’ जल्द ही आपके पास होगा जो इस जानलेवा बीमारी से हम सभी के शरीर में रोग निरोधक क्षमता विकसित करेगा ।

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