हिंदुस्तान ने लिया हंदवाड़ा का बदला, 12 लाख का इनामी हिजबुल आतंकी रियाज़ नायकू ढेर

जम्मू-कश्मीर में कर्नल-मेजर समेत 8 जवानों की शहादत के बाद सुरक्षाबलों को बड़ी कामयाबी हाथ लगी है. कश्मीर के अवंतीपोरा में सुरक्षाबलों ने बुधवार को हिजबुल कमांडर रियाज नायकू को मार गिराया है.

पुलवामा में हुआ एनकाउंटर

सुरक्षा बलों को बेगपोरा गांव में नायकू और उसके कुछ साथियों की मौजूदगी की खबर मिली थी तभी मंगलवार को ही उसके घर के बाहर घेराबंदी कर दी गई थी. बताया जा रहा है कि सेना की 55 आरआर और सीआरपीएफ की एक संयुक्त टीम ने बेगपोरा में मंगलवार रात ही सर्च ऑपरेशन शुरू किया. जैसे ही सुरक्षाबलों की संयुक्त टीम संदिग्ध स्थान की ओर बढ़ी, छिपे हुए आतंकवादियों ने उन पर गोलीबारी की, जिसके बाद मुठभेड़ शुरू हो गई.

IED से उड़ाया घर

बाद में सुरक्षा बलों ने 40 किलो आईईडी से उस घर को उड़ा दिया जिसमें छुपकर नायकू और उसका साथी आतंकी आदिल फायरिंग कर रहे थे. और इसके साथ ही दोनों आतंकियों का काम तमाम हो गया. नायकू का मारा जाना सुरक्षाबलों के लिए बहुत बड़ी कामयाबी माना जा रहा है.

12 लाख रुपए का इनाम था

रियाज नायकू कश्मीर में सबसे ज्यादा समय तक सक्रिय रहने वाला आतंकी था। वह हिजबुल मुजाहिद्दीन के लिए काम करता था। उसे मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों की ए++ कैटेगरी में रखा गया था। उस पर 12 लाख रुपए का इनाम भी था। बताया जाता है कि नायकू अपने चुनिंदा करीबी लोगों के अलावा किसी पर भरोसा नहीं करता था। शायद यही वजह थी कि वह बचा रहा। उसने कई स्थानीय लोगों को आतंकी बनाया।

पुलिसवालों के परिजनों को अगवा करता था

रियाज अहमद नायकू की उम्र करीब 35 साल थी वो बेहद कम वक्त में हिजबुल का अहम हिस्सा बन गया था। पुलिस अफसरों के परिवार के लोगों का अपहरण और आतंकी के मरने पर उसके जनाजे में गम सैल्यूट देना इसी ने शुरु किया था. अपनी छवि की वजह से नायकू ने कई कश्मीरी युवाओं को आतंक के दलदल में ढकेला था.

मैथ टीचर से बना आतंकी

रियाज के पिता उसके आतंकी बनने के बाद से इतने दुखी थे कि उसे परिवार के लिये मरा हुआ मानते थे. रियाज के पिता के मुताबिक वो पढ़ने में होशियार था और इंजीनियर बनना चाहता था. वो गणित विषय में बहुत अच्छा था. पिता ने एक इंटरव्यू में बताया था कि रियाज नायकू को 12वीं में 600 में से 464 नंबर मिले थे. वह प्राइवेट स्कूल में मैथ भी पढ़ाने लगा था।

बुरहान वानी के बाद उभरा था नायकू

रियाज नायकू यूं तो साल 2012 से ही आतंक  रास्ते पर चल निकला था लेकिन साल 2016 में बुरहान वानी की मौत के बाद वो वहां के लोगों के लिए आतंक का नया चेहरा बन गया था। वह अवंतीपोरा का ही रहनेवाला था। पिछले साल आतंकी सबजार भट की मौत के बाद उसे हिज्बुल मुजाहिदीन का कमांडर बनाया गया था। इससे पहले भी उसे कई बार घेरा गया था लेकिन वह हर बार बचकर निकलने में कामयाब हो जाता था।

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