पेट्रोल-डीज़ल पर केन्द्र ने बढ़ाई एक्साइज ड्यूटी, लेकिन आप पर नहीं होगा असर, पढ़िए पूरी रिपोर्ट

इंटरनेशनल मार्केट में कच्चे तेल की गिरती कीमतों के बीच केन्द्र सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज और रोड सेस बढ़ा दिया है. लेकिन राहत की बात ये है कि पेट्रोल और डीजल के इन बढ़े दाम का उपभोक्ता पर कोई असर नहीं होगा. यानी तेल के दाम वहीं रहेंगे.

पेट्रोल-डीजल पर बढ़ी एक्साइज ड्यूटी
पेट्रोल पर 8 रुपये रोड सेस और 2 रुपये एक्साइज़ ड्यूटी बढ़ाई गई है,  इस तरह पेट्रोल पर 10 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. वहीं डीज़ल पर 8 रुपये रोड सेस और 5 रुपये एक्साइज ड्यूटी बढ़ाई गई है, इस तरह कुल 13 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई है. बढ़े हुए दाम मंगलवार मध्‍यरात्रि से ही लागू हो गए हैं.

आपकी जेब पर असर नहीं
उत्पाद शुल्क में बढ़ोतरी का नतीजा सामान्य तौर पर पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि के रूप में सामने आता है। लेकिन इस बार एक्साइज ड्यूटी और रोड सेस बढ़ने के बावजूद उपभोक्ता के लिए दाम नहीं बढ़ रहे हैं क्योंकि कंपनियों ने इस बढ़े हुए दाम को कंज्यूमर को पास ऑन करने का फैसला नहीं किया है बल्कि वह खुद ही इस को सहन करेंगी.

लॉकडाउन का असर

कोरोना वायरस संक्रमण के चलते कच्चे तेल की मांग ना होने के कारण उसके दाम अपने न्यूनतम स्तर पर हैं..पिछले महीने ही ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत प्रति बैरल 18.10 डॉलर पर पहुंच गई थी. यह 1999 के बाद से सबसे कम कीमत थी. हालांकि इसके बाद कीमतों में थोड़ी वृद्धि हुई और अब ये करीब 30 डॉलर प्रति बैरल है जो कि काफी कम है..अमेरिका मे तो  कच्चे तेल की कीमत बोतलबंद पानी से कम लगभग 77 पैसे प्रति लीटर हो गई है. पिछले दिनों अंतरराष्ट्रीय बजार में  कच्चे तेल का भाव गिरते-गिरते लगभग शून्य तक पहुंच गया था

रूस-अमेरिका की प्रतिस्पर्धा

कोरोना वायरस और अमेरिका-रूस में एक-दूसरे से ज्यादा तेल उत्पादन की लगी होड़ के कारण कच्चे तेल की कीमत में बड़ी गिरावट दर्ज की जा रही है। इससे पेट्रोल-डीजल की लागत में अच्छी-खासी गिरावट आई है, लेकिन सरकार ने पहले की तरह ही इस बार भी घटते अंतर्राष्ट्रीय भाव का फायदा रोकने का सिलसिला बरकरार रखा है।

उत्पादन ज्यादा खरीदार नहीं

मई महीने में तेल का करार निगेटिव हो गया है..जिसका  मतलब ये है कि खरीदार तेल लेने से इनकार कर रहे हैं. वहीं, उत्पादन इतना हो गया है कि अब तेल रखने की जगह नहीं बची है…दुनिया भर में लॉकडाउन के कारण गाड़ियों का चलना लगभग बंद है. कामकाज और कारोबार बंद होने की वजह से तेल की खपत और उसकी मांग भी कमी आई है..जिसका असर दुनिया के बाज़ारों पर भी दिख रहा है।

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