ऑपरेशन खत्म करके वो घर नहीं लौटा, आ रहा है पार्थिव शरीर, शहीद की शहादत को सलाम

देशभक्ति और वीरता जिसके रग-रग में भरी थी वो शहीद कर्नल आशुतोष आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन पूरा होने के बाद अगले दिन फ्लाइट पकड़कर घर आने वाले थे । लेकिन ऐसा नहीं हुआ । उन्होंने अपनी मां से हंदवाड़ा घुमाने का वाद किया था लेकिन वो वादा भी नहीं निभाया पाए । निभाते भी कैसे उन्हे तो मां भारती की रक्षा करनी थी । मां भारती की रक्षा करते हुए उन्होंने  प्राण न्योछावर कर दिया । शहीद कर्नल आशुतोष एक जांबाज ऑफिसर थे वे खुद नहीं आए लेकिन आज जयपुर आ रहा है उनका पार्थिव शरीर ।  

सोमवार को देश ने अपने पांच जांबाज सपूतों को खो दिया । जम्मू कश्मीर के हंदवाड़ा में पाकिस्तान की नापाक पैदाइश से लोहा लेते वक्त हमारी सेना के दो ऑफिसर समेत 5 जवान शहीद हो गए । हालांकि हमारे वीर सपूतों ने दो आतंकियो को मौत के घाट उतार दिया । मारे गए आतंकियों में लश्कर-ए-तैयबा का टॉप कमांडर हैदर था।

 बंधक को बचाने के लिए ऑपरेशन

दरअसल आतंकियों के छिपने की खबर मिलने के बाद उत्तरी कश्मीर के एक घर पर सिक्योरिटी फोर्स ने ऑपरेशन शुरू किया । यहां आतंकियों ने घर के लोगों को बंधक बनाकर रखा था, उन्हीं को बचाने सेना और पुलिस की टीम गई थी । इन लोगों को सिक्योरिटी फोर्स ने छुड़ा लिया। सिक्योरिटी फोर्स के इस ऑपरेशन का नेतृत्व 21 राष्ट्रीय रायफल्स के शहीद हुए कमांडिंग ऑफिसर कर्नल आशुतोष शर्मा कर रहे थे । जिनके नेतृत्व में भारतीय सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ कई ऑपरेशनों को अंजाम दिया था और आतंकियों को सबक सिखाया ।

शहादत को सलाम

कमांडिंग ऑफिस कर्नल आशुतोष शर्मा के साथ शहीद होने वालों में मेजर अनुज सूद,  सब इंस्पेक्टर शकील काजी,  लांस नायक दिनेश और राइफलमैन राजेश शामिल हैं। वे गार्ड्स रेजिमेंट से थे और यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले थे । कर्नल आशुतोष शर्मा काफी लंबे समय से गार्ड्स रेजिमेंट में रहकर घाटी में तैनात थे और आतंकवादियों के खिलाफ बहादुरी के लिए दो बार सेना मेडल से सम्मानित किए जा चुके थे । आतंकियों को सबक सिखाने के लिए वह जाने जाते थे ।  

2015 के बाद कर्नल की शहादत

शहीद कर्नल आशुतोष अपनी बहादुरी के लिए जाने जाते थे । वे ऐसे पहले कमांडिंग अफसर थे, जिन्होंने पिछले 5 साल में आतंकियों  से एनकाउंटर में अपनी जान गंवाई है । इससे पहले 2015 के जनवरी में कश्मीर घाटी में आतंकियों से एनकाउंटर में कर्नल एमएन राय शहीद हो गए थे । इसके अलावा, उसी साल नवंबर में कर्नल संतोष महादिक भी आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन में हो गए थे। 

कुर्बानी को नहीं भुलाया जा सकता – पीएम मोदी  

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा हंदवाड़ा में शहीद हुए जवानों की वीरता को नमन करता हूं । उनकी वीरता और कुर्बानी को भुलाया नहीं जा सकता। वे बिना थके, समर्पण के साथ देश के लोगों की सुरक्षा में लगे रहे। मैं उनके परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं व्यक्त करता हूं।

पीएम ने ट्वीट करते हुए लिखा 

✔@narendramodi

Tributes to our courageous soldiers and security personnel martyred in Handwara. Their valour and sacrifice will never be forgotten. They served the nation with utmost dedication and worked tirelessly to protect our citizens. Condolences to their families and friends.

वहीं रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह  ने कहा कि हंदवाड़ा में जवानों की शहादत बेहद दुखी करने वाली है । आतंकियों के साथ लड़ाई में उन्होंने अदम्य साहस दिखाया और देश के लिए जान न्योछावर कर दी। देश उनके बलिदान और बहादुरी को याद रखेगा।

पत्नी को शहादत पर गर्व

हंदवाड़ा एनकांउटर में कर्नल आशुतोष के शहीद होने की खबर से परिवार वालों की आंखें छलक पड़ीं । एक शहीद की पत्नी ने इतने बड़े सदमे से खुद को संभाला । शहीद कर्नल की पत्नी पल्लवी ने कहा कि आर्मी ज्वाइन करने के बाद से आशु का पैशन और ड्रीम सिर्फ उनकी यूनिफार्म थी । ऐसे में कोई उनकी शहादत पर अफसोस जताए, यह सही नहीं है । आशु ने आतंकियों से एनकाउंटर  के दौरान जो किया यह उनका निर्णय था । हमें उनके निर्णय का सम्मान करना पड़ेगा । वे देश के लिए शहीद हुए हैं । इसलिए हमारी आंखों में गम के आंसू नहीं हैं । हमें उनकी शहादत पर गर्व है । इतना ही नहीं शहीद कर्नल की पत्नी पल्लवी ने कहा, ‘आखिरी बार 1 मई को आशुतोष से बात हुई थी । उसके बाद वह ऑपरेशन में चले गए थे। मैं आखिरी बार उनसे 28 फरवरी को उधमपुर में मिली थी । इसके बाद हमारी सिर्फ फोन पर बात हुई थी।’

हम आपको बता दें कि शहीद कर्नल यूपी के बुलंदशहर के रहने वाले थे लेकिन उनका परिवार फिलहाल जयपुर में रहता है । सोमवार को जयपुर में उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा । कोरोना और लॉकडाउन की वजह से कर्नल का पार्थिव शरीर उनके पैतृक गांव नहीं ले जाया जा रहा है। शहीद की शहादत को नमन ।

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