लॉकडाउन में सैर को निकले विधायक पहुंचे ‘लॉकअप’, फर्जीवाड़े के आरोपी अमनमणि त्रिपाठी गिरफ्तार

कोरोना के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लगा है लोगों को घर से निकलने की मनाही है लेकिन इसी लॉकडाउन के बीच यूपी के नौतनवां के निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी के सिर उत्तराखंड सैर करने की ऐसी धुन सवार हुई कि उन्होंने तमाम नियम कानूनों की धज्जियां उड़ा दी और तीन गाड़ियों से तकरीबन एक दर्जन लोगों के साथ बदरीनाथ घूमने निकल पड़े लेकिन पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया.

पहले उत्तराखंड फिर यूपी में गिरफ्तारी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधायक अमनमणि त्रिपाठी समेत 7 लोगों को यूपी के बिजनौर में गिरफ्तार किया गया. इससे पहले उन्हें उत्तराखंड में भी गिरफ्तार किया गया था लेकिन बाद में निजी मुचलके पर छोड़ दिया गया था. खबरों के मुताबिक नजीबाबाद में अमनमणि अपने 6 साथियों के साथ दो लग्जरी गाड़ियों में घूम रहे थे तभी पुलिस ने इन्हें पकड़ा. बताया जा रहा है कि जब इनसे पास मांगा गया तो वो पास नहीं दिखा पाए जिसके बाद सभी सातों लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया.

घूमने के लिए किया फर्जीवाड़ा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमनमणि त्रिपाठी ने उत्तराखंड जाने के लिए पास बनवाने में भी फर्जीवाड़ा किया, बताया जा रहा है कि विधायक ने यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पिता के निधन पर उनके घर जाकर सांत्वना देने का हवाला देते हुए बदरीनाथ और केदारनाथ जाने का पास बनवाया था.

क्या है पूरा मामला ?

यूपी के विधायक अमनमणि त्रिपाठी अपने 11 साथियों के साथ रविवार शाम को तीन इनोवा गाड़ियों में सवार होकर बदरीनाथ के लिए निकले थे। विधायक के पास मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव ओमप्रकाश के हस्ताक्षर वाला पास था जिसमे लिखा था कि अमनमणि त्रिपाठी उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वर्गीय पिता के पितृ कार्य के लिए बदरीनाथ जाएंगे और उसके बाद यहां से श्री केदारनाथधाम भी जाएंगे।

योगी के भाई ने जताई नाराज़गी

इस घटना के सामने आने के बाद योगी के भाई महेंद्र सिंह बिष्ट ने इस पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि-‘आखिर अमनमणि त्रिपाठी होते कौन हैं, जो पितृ पूजन करेंगे।’ महेंद्र बिष्ट ने साफ कहा, ‘हमने एक दिन पहले ही अपने पिता का अस्थि विसर्जन किया है। हम तीन भाई हैं। अमनमणि को ये हक किसने दिया कि वह हमारे पिता का पितृ पूजन करें।’

यूपी सरकार ने पल्ला झाड़ा

इन सबके बीच उत्तर प्रदेश सरकार का कहना है कि अमनमणि त्रिपाठी को उत्तराखंड जाने के लिए अधिकृत ही नहीं किया गया था। सरकार ने कहा कि वह अपने कृत्य के लिए खुद जिम्मेदार हैं और इस घटना को मुख्यमंत्री के साथ जोड़ना निंदनीय है। लेकिन बड़ा सवाल ये है कि जब यूपी सरकार ने अमनमणि को अधिकृत नहीं किया था तो उन्हें पास आखिर किसने जारी किए.

कर्णप्रयाग में भी रोकी गई थी गाड़ियां

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विधायक अमनमणि त्रिपाठी और उनके साथियों की गाड़ियां उत्तराखंड के कर्णप्रयाग में भी रोकीं गई थी जहां विधायक ने अपनी हेकड़ी दिखाई थी और एसडीएम के काफी समझाने के बाद जब वो वहां से लौट रहे थे तो व्यासी थाना क्षेत्र में भी उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था. लेकिन फिर इन्हें निजी मुचलके पर रिहा करते हुए यूपी बॉर्डर पर छोड़ा गया जहां एक बार फिर बिजनौर में विधायक और उनके साथियों की गिरफ्तारी की गई.

You may also like...