बॉलीवुड को एक और सदमा, मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान का निधन

साल 2020 बॉलीवुड के लिए बेहद बुरा साबित हो रहा है पहले ऋषिकपूर फिर इरफान खान, संगीतकार वाजिद और उसके बाद एक्टर सुशांत सिंह के जाने के बाद अब बॉलीवुड की मशहूर कोरियोग्राफर सरोज खान भी इस दुनिया को हमेशा के लिए छोड़ कर चली गईं.

कार्डियक अरेस्ट से निधन

कोरियोग्राफर सरोज खान का कार्डियक अरेस्ट के चलते बीती रात मुंबई में निधन हो गया. वो पिछले कुछ दिनों से अस्वस्थ चल रही थीं, उन्हें बांद्रा स्थित एक हॉस्पिटल में एडमिट कराया गया था. देर रात उनकी तबीयत ज्यादा बिगड़ गई और शुक्रवार को उनका निधन हो गया.

सांस लेने में थी तकलीफ

सरोज खान को सांस लेने में तकलीफ के बाद गुरू नानक अस्पताल में एडडमिट कराया गया था हालांकि उनका कोविड-19 टेस्ट निगेटिव आया था. सरोज खान 71 साल की थीं. परिवार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि उनका स्वास्थ्य धीरे-धीरे बेहतर हो रहा था. लेकिन अचानक तबीयत बिगड़ने के बाद उनका निधन हो गया. सरोज खान का अंतिम संस्कार शुक्रवार को मुंबई स्थित मलाड के मालवाणी में होगा.

फिल्म इंडस्ट्री में 4 दशक

सरोज खान फिल्म इंडस्ट्री में चार दशक से काम कर रही थी. इस लंबे करियर में सरोज खान ने 2,000 से ज्यादा गानों की कोरियोग्राफी की. सरोज खान को अपनी कोरियोग्राफी की कला के चलते 3 बार नेशनल अवॉर्ड मिल चुका था. संजय लीला भंसाली की फिल्म देवदास में डोला-रे-डोला गाने की कोरियोग्राफी के लिए उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था. वहीं माधुरी दीक्षित की फिल्म तेजाब के यादगार आइटम सॉन्ग एक-दो-तीन और साल 2007 में आई फिल्म जब वी मेट के सॉन्ग ये इश्क… के लिए भी उन्हें नेशनल अवॉर्ड मिला था.

माधुरी की पसंदीदा कोरियोग्राफर

सरोज खान ने कई फिल्मों में श्रीदेवी और माधुरी दीक्षित जैसे सितारों को अपने इशारों पर नचाया था. माधुरी से तो उनकी जबरदस्त केमिस्ट्री थी. माधुरी दीक्षित ने जब शादी के बाद कमबैक किया था तो उनकी फिल्म आ जा नच ले को सरोज खान ने ही कोरियोग्राफ किया था.

आखिरी फिल्म कलंक

सरोज खान लंबे समय से अपने काम से ब्रेक पर थीं लेकिन बीते साल (2019) उन्होंने वापसी की और मल्टीस्टारर फिल्म ‘कलंक’ और कंगना रनौत की फिल्म ‘मणिकर्णिकाः द क्वीन ऑफ झांसी’ में एक-एक गाने को कोरियॉग्राफ किया था। सरोज का आखिरी गाना करण जौहर के प्रोडक्शन हाउस के तले बनी फिल्म कलंक में ‘तबाह हो गए’ था जिसमे माधुरी नजर आई थीं.

गीता मेरा नाम पहली फिल्म

यूं तो सरोज खान ने सिर्फ 3 साल की उम्र से बतौर बैकग्राउंड डांसर अपना करियर शुरू किया था लेकिन उन्हें 1974 में पहली बार गीता मेरा नाम से बतौर कोरियॉग्राफर फिल्म इंडस्ट्री में ब्रेक मिला। सरोज खान ने कुछ फिल्मों में बतौर राइटर भी काम किया है।

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