पूर्व बाहुबली सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का कोविद -19 से निधन

राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन का दिनांक 01/05/2021 शनिवार सुबह दिल्ली के एक अस्पताल में निधन हो गया जहां वह COVID19 से संक्रमित थे।
मोहम्मद शहाबुद्दीन (10 मई 1967 – 1 मई 2021) एक भारतीय राजनीतिज्ञ थे। … वे बिहार राज्य में सिवान निर्वाचन क्षेत्र से पूर्व सांसद, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, राष्ट्रीय जनता दल और राष्ट्रीय जनता दल की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के पूर्व सदस्य थे।

बता दें की सहाबुद्दीन पर कई आपराधिक मुकद्दमे सिद्ध हो चुके थे जिसके कारन वो दिल्ली के तिहाड़ जेल में उम्रकैद काट रहा था।
मामला था अगस्त 2004 में शहाबुद्दीन और उसके लोगों ने रंगदारी न देने पर सीवान के प्रतापपुर गांव में चंदा बाबू के दो बेटों सतीश और गिरीश रौशन को तेजाब डालकर जिंदा जला दिया था. इससे पहले पटना हाई कोर्ट ने 9 दिसंबर 2015 को सिवान की विशेष अदालत के दिए फैसले को जारी रखा था. इसमें शहाबुद्दीन समेत चार लोगों को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी.

राजेंद्र प्रसाद के जीरादेई से ही ये गुंडा बना था विधायक

अस्सी के दशक में बिहार का सीवान जिला तीन लोगों के लिए जाना जाता था. भारत के पहले राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद, सिविल सर्विसेज़ टॉपर आमिर सुभानी और ठग नटवर लाल. राजेंद्र प्रसाद सबके सिरमौर थे. आमिर उस समय मुसलमान समाज का चेहरा बने हुए थे. और नटवर के किस्से मशहूर थे. उसी वक़्त एक और लड़का अपनी जगह बना रहा था. शहाबुद्दीन. जो कम्युनिस्ट और बीजेपी कार्यकर्ताओं के साथ खूनी मार-पीट के चलते चर्चित हुआ था. इतना कि शाबू-AK 47 नाम ही पड़ गया. 1986 में हुसैनगंज थाने में इस पर पहली FIR दर्ज हुई थी. आज उसी थाने में ये A-लिस्ट हिस्ट्रीशीटर है. मतलब वैसा अपराधी जिसका सुधार कभी नहीं हो सकता.

अस्सी के दशक में ही लालू प्रसाद यादव मुख्यमंत्री पद के लिए अपनी दावेदारी पक्की कर रहे थे. शहाबुद्दीन लालू के साथ हो लिया. मात्र 23 की उम्र में 1990 में विधायक बन गया. विधायक बनने के लिए 25 मिनिमम उम्र होती है. फिर ये अपराधी दो बार विधायक बना और चार बार सांसद. 1996 में केन्द्रीय राज्य मंत्री बनते-बनते रह गया था. क्योंकि एक केस खुल गया था. वो तो हो गया, पर लालू को जिताने के लिए इसकी जरूरत बहुत पड़ती थी. उनके लिए ये कुछ भी करने को तैयार था. और लालू इसके लिए. इसी प्रेम में बिहार में अपहरण एक उद्योग बन गया. सैकड़ों लोगों का अपहरण हुआ. बिजनेसमैन राज्य छोड़-छोड़ के भाग गए. कोई आना नहीं चाहता था. इसी दौरान और भी कई अपराधी आ गए.

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