CORONA MASJID MYSTERY: देश की मस्जिदों में जमात के कितने ‘कोरोना बम’ ?

देश में कोरोना वायरस का कहर बढ़ता जा रहा हैं। हर रोज इसके संक्रमितों की संख्या बढ़ रही है । इस बीच राजधानी दिल्ली के निजामुद्दीन से आए कोरोना के मामले ने सबके होश उड़ा दिए। निजामुद्दीन के तबलीगी जमात के मरकज में कोरोनावायरस के विस्फोटक यानी संक्रमण का सबसे बड़ा मामला सामने आया है। करीब 200 लोगों को फौरन पुलिस ने अस्पतालों में भर्ती कराया। जिसमें 24 पॉजिटिव पाए गए हैं। अब सवाल उठता है कि क्या देश के खिलाफ कोरोना फैलाने की साजिश की गई? क्या देश को तबाह करने के लिए दिल्ली को चुना गया ? इस साजिश के पीछे कौन लोग हैं?

निजामुद्दीन में कितनी कोरोना जमात ?

सरकारी आकड़े के मुताबिक में 21 मार्च तक हजरत निजामुद्दीन मरकज में करीब 1746 लोग रुके हुए थे। इनमें 216 विदेशी और 1530 भारतीय नागरिक थे। इतना ही नहीं मरकज के प्रोग्राम निजामुद्दीन के अलावा देश के अलग-अलग हिस्सों में करीब 824 विदेशी नागरिक 21 मार्च तक तबलीग की गतिविधियों में शामिल थे। लेकिन कहा ये भी जा रहा हैं दो हफ्ते में करीब 5 हजार से ज्यादा लोग यहां आते रहे।

क्या तबाही फैलाना था मरकज का मकसद ?

तबलीगी जमात का मरकज 1 मार्च से 15 मार्च के बीच हुआ। तो सवाल उठना लाजमी हैं कि मरकज में आए विदेशियों का मकसद भारत में कोरोना को फैलाना था। ऐसा इसलिए कहा जा रहा कि मरकज के एक हफ्ते बाद भी ये लोग दिल्ली और देश के दूसरे राज्यों में रुके रहे।जबकि देश में जनता कर्फ्यू 22 मार्च को लगा। दिल्ली में लॉकडाउन का ऐलान 23 मार्च को हुआ। वहीं देश में 24 मार्च आधी रात से लॉकडाउन लगा है। इसलिए इनके रुकने से आशंका पैदा हो रही हैं।

मस्जिदों को बनाया कोरोना अड्डा?

दिल्ली में पुलिस को विदेश से आए 281 तबलीगी जमात के लोग मिले हैं। जिसमें इंडोनेशिया के 72, श्रीलंका के 34, म्यांमार के 33, किर्गिस्तान के 28, मलेशिया के 20, नेपाल और बांग्लादेश के 9-9, थाइलैंड के 7, फिजी के 4, इंग्लैंड के 3 और अफगानिस्तान, अल्जीरिया, जिबूती, सिंगापुर, फ्रांस व कुवैत के 1-1 शामिल हैं। इसके साथ ही बिहार की राजधानी पटना में 12 से 15 जमात के विदेशी नागरिक को पकड़ा गया था । ये सभी पटना में एक मस्जिद से पकड़े गए। वहीं मंगलवार को लखनऊ के अमीनाबाद मस्जिद से 6 किर्गिस्तान के, यूपी के बिजनौर में एक मस्जिद से 5 , दुर्ग में 8, महाराष्ट्र के अहमदनगर से 10 पकड़े गए हैं।

देश से कितने दुश्मन मरकज में ?

कोरोना संक्रमण भारत में 30 जनवरी को पहुंचा । इसके बाद प्रधानमंत्री ने अपनी कैबिनेट के साथ देश के लोगों से अनुरोध किया कि किसी समारोह का हिस्सा ना बनें। इसके बावजूद अलग-अलग राज्यों से तबलीगी जमात के लोग इसमें शामिल होने के लिए आए। जिसमें तमिलनाडु से सबसे ज्यादा 501, असम के 216, यूपी के 156, महाराष्ट्र के 109, मध्य प्रदेश के 107, बिहार के 86, पश्चिम बंगाल के 73, तेलंगाना के 55, झारखंड के 46, कर्नाटक के 45, उत्तराखंड के 34, हरियाणा के 22, अंडमान निकोबार के 21, राजस्थान के 19, हिमाचल प्रदेश, केरल और उड़ीसा के 15-15, पंजाब के 9 और मेघालय के 5 लोग हैं।

मरकज से दिल्ली बना कोरोना सेंटर !

दिल्ली के निजामुद्दीन में मरकज में करीब देश के ग्यारह राज्य और 16 देशों से पांच से आठ हजार लोग आए। जिनमें 281 विदेशी थे। इसमें ज्यादातर कोरोना संक्रमित थे। मरकज में सोशल डिस्टेंसिंग की अनदेखी हुई। इसके बाद ये लॉकडाउन की वजह से मस्जिदों में छिपे रहे। लेकिन दिल्ली में एकएक की तबीयत बिगड़ी और फिर मौत हो गई। सोमवार को मामला सामने आते ही 200 कोरोना संदिग्धों को दिल्ली के अस्पतालों में भर्ती कराया गया जिसमें 24 पॉजिटिव भी है। वहीं मंगलवार को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा- अब तक 1 हजार 548 लोगों को निजामुद्दीन मरकज से बाहर निकला गया है। उनमें 441 लोगों को बुखार और खांसी जैसे लक्षण मिलने पर अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।

बता दे तबलीगी जमात के मरकज में शामिल 6 लोग तेलंगाना में दम तोड़ चके एक-एक जम्मू कश्मीर और दिल्ली में मर चुका है। लेकिन इनके संपर्क में आए लोगों ने देश के किन-किन में राज्यों कोरोना के महामारी को पहुंचाया। साथ ही मस्जिदों के पोसे गए ‘कोरोना बमों’ का असली रुप तो क्वारंटांइन के बाद ही सामने आएगा। क्योंकि होम मिनिस्ट्री के आदेश पर राज्यों ने मरकज शामिल लोगों को 14 दिनों के आइसोलेशन में रखना शुरू किया है।

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